PM Modi Sanskrit Subhashitam: पीएम मोदी ने साझा किया परिश्रम का संदेश
पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे छह गुणों के महत्व को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे छह गुणों के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, सुभाषित का संदेश है कि जिन लोगों में ये गुण मौजूद होते हैं, उन्हें दैवीय सहायता भी प्राप्त होती है।
पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री ने लिखा—
“उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥”
इसका भावार्थ है कि जिस व्यक्ति में उद्यम यानी परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे छह गुण मौजूद होते हैं, उसके प्रयासों में दैवीय सहायता भी मानी जाती है। इस सुभाषित का यही भाव विभिन्न संस्कृत स्रोतों में भी मिलता है।
छह गुणों के जरिए कर्म और प्रयास का संदेश
इस श्लोक में व्यक्ति के प्रयास और उसके गुणों को सफलता से जोड़ा गया है। इसका संदेश है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल भाग्य के भरोसे रहने के बजाय लगातार प्रयास करना जरूरी है।
उद्यम व्यक्ति को मेहनत के लिए प्रेरित करता है, जबकि साहस उसे चुनौतियों का सामना करने की ताकत देता है। धैर्य कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने में मदद करता है और बुद्धि सही निर्णय लेने तथा समस्याओं का समाधान खोजने में उपयोगी होती है।
इसी तरह शक्ति व्यक्ति को अपने कार्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता देती है और पराक्रम उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ बाधाओं का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
भाग्य से पहले पुरुषार्थ का संदेश
सुभाषित का व्यापक भाव यह है कि व्यक्ति को अपने लक्ष्य के लिए स्वयं प्रयास करना चाहिए। मेहनत, सूझबूझ, साहस और धैर्य के साथ किए गए प्रयासों से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए इस श्लोक में इसी विचार को संस्कृत के पारंपरिक सुभाषित के माध्यम से सामने रखा गया है।
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