CBSE Three Language Policy: कक्षा 6 के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7, 8 और 9 के समान संक्रमणकालीन राहत देने का निर्देश दिया है।
सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया कि कक्षा 6 के छात्रों को भी कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों के लिए लागू संक्रमणकालीन व्यवस्था का लाभ दिया जाए।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने यह निर्देश उस समय दिया, जब केंद्र सरकार ने मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 6 के छात्रों को छूट देने का समर्थन नहीं किया था।
तीसरी भाषा को लेकर क्या मिली राहत?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक वर्तमान कक्षा 6 के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा के मामले में वही राहत मिलेगी जो पहले कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को दी गई थी।
इस संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रह सकती है, लेकिन भविष्य में कक्षा 10 की CBSE बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा को लेकर पास-फेल का प्रभाव नहीं होगा। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
केंद्र ने छूट देने का किया था विरोध
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से कहा कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को इस शैक्षणिक वर्ष में छूट देने की जरूरत नहीं है। सरकार के मुताबिक CBSE से संबद्ध अधिकांश स्कूल नई भाषा नीति को लागू करने के लिए तैयार हैं।
अदालत को बताया गया कि 28,819 CBSE स्कूलों में करीब 98.8 प्रतिशत स्कूलों ने नीति लागू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था कर ली है। पाठ्यपुस्तकों और अन्य शिक्षण सामग्री की उपलब्धता की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए अचानक नीति लागू करने से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों पर विचार किया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कक्षा 6 के लिए इसे एक तरह से "सॉफ्ट लॉन्च" के रूप में लागू करने का सुझाव दिया।
अदालत के सामने यह भी बताया गया कि नई व्यवस्था को लेकर कुछ स्कूलों में शिक्षक, किताबों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित तैयारियों का सवाल उठा था।
तीन-भाषा नीति में क्या है प्रावधान?
CBSE की संशोधित व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और National Curriculum Framework for School Education (NCF-SE) 2023 के अनुरूप तैयार की गई है।
इसके तहत विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन निर्धारित किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं होनी हैं। तीसरी भाषा से जुड़े प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7–9 के विद्यार्थियों के समान संक्रमणकालीन राहत मिलने से इस बैच पर अचानक लागू होने वाले तीसरी भाषा के बोर्ड परीक्षा संबंधी प्रभाव को टाल दिया गया है।
CBSE को स्कूलों में भाषा नीति से जुड़ी व्यवस्था को आगे मजबूत करने का समय भी मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई भी करेगा।
छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस आदेश का सीधा असर वर्तमान कक्षा 6 के CBSE विद्यार्थियों पर पड़ेगा। उन्हें तीसरी भाषा को लेकर वही संक्रमणकालीन सुरक्षा मिलेगी जो पहले से कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को उपलब्ध है।
इससे मौजूदा कक्षा 6 बैच के लिए नई भाषा व्यवस्था को लेकर तत्काल परीक्षा संबंधी दबाव कम होगा, जबकि CBSE तीन-भाषा व्यवस्था को आगे लागू करने की प्रक्रिया जारी रख सकेगा।
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