Kushinagar Flood 2026: नारायणी नदी का तटबंध टूटा, कई गांवों में घुसा पानी
कुशीनगर में नारायणी नदी के दबाव से एपी तटबंध टूटने के बाद कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। प्रशासन और आपदा राहत टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सोमवार देर रात नारायणी यानी बड़ी गंडक नदी के दबाव के चलते एपी तटबंध का एक हिस्सा टूट गया। सेवरही क्षेत्र के जवहीं दयाल गांव के ततवा टोली के सामने हुई इस घटना के बाद नदी का पानी तेजी से आसपास के गांवों की ओर फैलने लगा। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा है और करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है।
तटबंध टूटते ही गांवों में फैलने लगा पानी
रिपोर्टों के अनुसार सोमवार रात करीब साढ़े 10 बजे एपी तटबंध का लगभग 20 फुट हिस्सा टूट गया। इसके बाद गौरहा, सिसवा, बाघाचौर, बाकखास, चैनपट्टी, आवपुर और भगवानपुर समेत आसपास के कई गांव प्रभावित हुए।
इससे पहले तटबंध के कुछ हिस्सों में रिसाव और कटान की स्थिति सामने आई थी। प्रशासन, बाढ़ खंड के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने जियोबैग तथा बोल्डर की मदद से रिसाव रोकने का प्रयास किया था। इसके बावजूद नदी के दबाव के बीच तटबंध का हिस्सा टूट गया।
करीब 20 हजार लोगों पर बाढ़ का असर
तटबंध टूटने के बाद छह से अधिक गांवों की करीब 20 हजार आबादी प्रभावित होने की रिपोर्ट है। ग्रामीण इलाकों में पानी तेजी से फैलने के कारण लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बनी।
प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और तटबंध के बचे हिस्से को सुरक्षित करना है। बाढ़ खंड की टीमें मौके पर बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
सीएम योगी ने अधिकारियों से ली जानकारी
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति का संज्ञान लिया। राज्य सरकार के मुताबिक मुख्यमंत्री ने गोरखपुर मंडलायुक्त, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और कुशीनगर के जिलाधिकारी से घटनाक्रम की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें मौके पर सक्रिय हैं।
NDRF और SDRF को भी सक्रिय किया गया
तटबंध टूटने के बाद राहत एवं बचाव अभियान को व्यापक बनाने के लिए आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों की टीम तटबंध के कमजोर हिस्सों की निगरानी कर रही है, ताकि आगे कटान और नुकसान को नियंत्रित किया जा सके।
पहले से बना हुआ था तटबंध पर दबाव
रिपोर्टों के अनुसार एपी तटबंध पर रविवार रात से ही दबाव बना हुआ था। जवही क्षेत्र में रिसाव की सूचना के बाद बचाव कार्य शुरू किया गया था। बाद में बिरवट के पास कटान का दबाव बढ़ा और सोमवार रात तटबंध का हिस्सा टूट गया।
कुशीनगर और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इससे पहले भी जिले में तटबंधों और नदी किनारे के क्षेत्रों में कटान तथा रिसाव की घटनाएं सामने आई थीं।
ग्रामीणों के सामान को नुकसान
स्थानीय लोगों के अनुसार तटबंध टूटने के बाद कई गांवों में पानी पहुंचने से घरों और सामान को नुकसान हुआ है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि तटबंध के करीब 70 से 100 मीटर तक कटने से कई गांव प्रभावित हुए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल प्रशासन का फोकस लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और नदी के आगे बढ़ते पानी से प्रभावित क्षेत्रों को बचाने पर है।
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