विशेष स्वच्छता अभियान 6.0: 5,102 करोड़ से ज्यादा की कमाई, 1,049 लाख वर्ग फीट जगह खाली
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के तहत पिछले पांच वर्षों में ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से 5,102.91 करोड़ रुपये की आय हुई। 1,049.54 लाख वर्ग फीट से ज्यादा कार्यालयी जगह खाली कराई गई।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6.0’ के कार्यान्वयन चरण की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों में स्वच्छता की अवधारणा अब केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रही है। यह सुशासन, रिकॉर्ड प्रबंधन, संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और कचरे के वैज्ञानिक निपटान से जुड़ी व्यापक कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान ई-कचरे और कबाड़ के निपटान से सरकार को 5,102.91 करोड़ रुपये की आय हुई है। इसी अवधि में सरकारी कार्यालयों में 1,049.54 लाख वर्ग फीट से अधिक स्थान खाली कराया गया, जिससे कार्यालयी जगह के बेहतर उपयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
स्वच्छता अभियान से प्रशासनिक सुधार तक
केंद्रीय मंत्री ने 2014 में शुरू हुए स्वच्छता अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में इसका मुख्य जोर साफ-सफाई और स्वच्छता सुविधाओं पर था। समय के साथ यह पहल सरकारी कार्यालयों में पुराने रिकॉर्ड, अनुपयोगी फर्नीचर, ई-कचरे और अन्य बेकार सामग्री के व्यवस्थित प्रबंधन तक विस्तारित हुई।
अभियान के तहत लंबित मामलों को कम करने, रिकॉर्ड की समीक्षा करने और अनुपयोगी सामग्री को हटाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
श्रमदान और पौधारोपण से अभियान की शुरुआत
प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रमदान किया। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधारोपण किया और पुराने रिकॉर्ड को हटाने की प्रक्रिया की प्रतीकात्मक शुरुआत की।
इस अवसर पर सफाई मित्रों को सुरक्षा किट और मिठाइयां देकर सम्मानित किया गया। DARPG को विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के लिए नोडल विभाग बनाया गया है।
CSIR मुख्यालय में भी विशेष अभियान
इसके बाद डॉ. जितेंद्र सिंह ने CSIR मुख्यालय का दौरा किया, जहां वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में अभियान की गतिविधियों का जायजा लिया गया। उन्होंने सफाई अभियान का नेतृत्व करने के साथ ‘स्वच्छता सिग्नेचर कैंपेन’ और पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया।
CSIR में पुराने रिकॉर्ड और कबाड़ की पहचान, उनके निपटान, कार्यालयी स्थान के बेहतर इस्तेमाल और कार्यस्थल को व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
180 लाख से ज्यादा फाइलों का निपटारा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विशेष स्वच्छता अभियानों के दौरान 180.48 लाख से अधिक फाइलों को बंद या हटाया गया है। इसके अलावा देशभर में 24.20 लाख से ज्यादा स्वच्छता स्थलों की पहचान कर उनकी सफाई की गई।
उन्होंने कहा कि अनावश्यक रिकॉर्ड और कबाड़ हटने के बाद खाली हुई जगह का इस्तेमाल हरित क्षेत्र विकसित करने या कम उपयोग वाली जगहों को अधिक उपयोगी बनाने में किया जा सकता है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में 705 वस्तुओं की पहचान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का भी दौरा किया। विशेष अभियान 6.0 के तहत पृथ्वी भवन और मौसम भवन से ई-कचरे तथा अनुपयोगी उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मंत्रालय में निपटान के लिए कुल 705 वस्तुओं की पहचान की गई है। मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने केंद्रीय मंत्री को इन वस्तुओं और प्रस्तावित निपटान प्रक्रिया की जानकारी दी।
100 से अधिक वैज्ञानिक संस्थान अभियान में शामिल
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, CSIR और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आने वाले 100 से अधिक वैज्ञानिक संस्थानों ने 2 अक्टूबर से विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में भाग लेना शुरू किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों में स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन और अनुपयोगी सामान के व्यवस्थित निपटान को मजबूत करना है।
‘कचरे से संपदा’ पर वैज्ञानिक जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अभियान को ‘कचरे से संपदा’ की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों का उद्देश्य केवल कचरे को हटाना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना भी है, जिनसे अपशिष्ट को उपयोगी सामग्री, ऊर्जा और आर्थिक अवसरों में बदला जा सके।
CSIR के तकनीकी क्षेत्र में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग, ई-कचरे से महत्वपूर्ण धातुओं की रिकवरी, लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग, बायोमेथेनेशन, कृषि अपशिष्ट से जैव-अपघटित उत्पाद, अपशिष्ट जल से संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और औद्योगिक कचरे से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने जैसी तकनीकें शामिल हैं।
31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 का कार्यान्वयन चरण 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें स्वच्छता के साथ लंबित मामलों का निपटारा, रिकॉर्ड की समीक्षा एवं छंटाई, कार्यालयी स्थान का बेहतर उपयोग, ई-कचरे और अनुपयोगी सामान का वैज्ञानिक निपटान तथा रिकॉर्ड प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस अभियान का व्यापक उद्देश्य सरकारी संस्थानों में स्वच्छता को एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया और बेहतर संसाधन प्रबंधन की स्थायी कार्यसंस्कृति के रूप में मजबूत करना है।
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