Tamil Nadu Power Crisis: 3,000 MW बिजली खरीदने के लिए अर्जेंट टेंडर जारी
तमिलनाडु में बढ़ती बिजली मांग और पवन ऊर्जा उत्पादन में गिरावट के कारण अतिरिक्त बिजली खरीदने की तैयारी है। TNPdCL ने पीक आवर्स के दौरान 3,000 मेगावाट तक बिजली खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। राज्य में अधिकतम मांग 19,921 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पूर्वी मानसून से मांग में राहत मिलने की उम्मीद है।
चेन्नई: तमिलनाडु में गर्मी का असर लंबे समय तक बने रहने और पवन ऊर्जा उत्पादन घटने से बिजली की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। स्थिति से निपटने के लिए तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TNPdCL) ने बिजली खरीदने के लिए तत्काल टेंडर जारी किया है। कंपनी शाम के पीक आवर्स में 3,000 मेगावाट तक बिजली खरीदने की व्यवस्था कर रही है।
इसके अलावा, आधी रात से सुबह 2 बजे के बीच 1,500 मेगावाट तक बिजली खरीदने की योजना है। यह खरीद 12 से 31 अक्टूबर तक की अवधि के लिए प्रस्तावित है।
शाम के समय बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत
राज्य में बिजली की मांग लगभग 20,000 मेगावाट के आसपास पहुंच रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर से गर्म मौसम बने रहने, पवन ऊर्जा उत्पादन में गिरावट और केंद्रीय बिजली उत्पादन केंद्रों से अपेक्षाकृत कम आपूर्ति के कारण अतिरिक्त बिजली खरीदने की जरूरत बढ़ी है।
टेंडर केंद्र सरकार के DEEP पोर्टल के जरिए जारी किया गया है। इसमें तमिलनाडु और दूसरे राज्यों के निजी बिजली उत्पादकों से बिजली आपूर्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। शाम 6 बजे से आधी रात तक बिजली खरीदने पर विशेष जोर दिया गया है। अंतिम अनुबंध और दरें निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय होंगी।
सोलर उत्पादन से दिन में राहत, शाम को बढ़ता दबाव
बिजली कंपनी के अनुसार, दिन के समय सौर ऊर्जा उत्पादन अधिक होने से राज्य में बिजली की उपलब्धता बेहतर रहती है। इसके उलट, शाम को सौर उत्पादन घटने और घरेलू व औद्योगिक खपत अधिक होने के कारण बिजली की कमी का दबाव बढ़ जाता है।
कंपनी पहले से ही अल्पकालिक खरीद, बिजली अदला-बदली की व्यवस्थाओं और पावर एक्सचेंज के जरिए अतिरिक्त बिजली हासिल कर रही है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर कम करने के लिए आगे भी जरूरत के मुताबिक खरीद की जा सकती है।
बिजली की खपत 432.6 मिलियन यूनिट तक पहुंची
रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को तमिलनाडु में बिजली की खपत 432.6 मिलियन यूनिट दर्ज की गई। इस दौरान अधिकतम मांग 19,921 मेगावाट तक पहुंच गई।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य के ताप विद्युत केंद्रों ने 80 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की, जबकि केंद्रीय उत्पादन केंद्रों से 83.4 मिलियन यूनिट बिजली मिली। अल्पकालिक खरीद के जरिए 38.5 मिलियन यूनिट और पावर एक्सचेंज से 36.5 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त हुई।
मानसून के आगमन पर टिकी नजर
अधिकारियों को उम्मीद है कि उत्तर-पूर्वी मानसून के आने से मौसम ठंडा होगा और बिजली की मांग में कमी आ सकती है। इससे कंपनी को अपने ताप विद्युत संयंत्रों की वार्षिक मरम्मत और रखरखाव की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यदि मानसून कमजोर रहता है और गर्मी का असर जारी रहता है, तो नवंबर में भी अतिरिक्त बिजली खरीदने की जरूरत पड़ सकती है।
मंत्री ने बताई अतिरिक्त खरीद की वजह
ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मल कुमार के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में पीक आवर्स में बिजली की मांग लगभग 3,000 मेगावाट बढ़ी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल से अपेक्षित बिजली उपलब्ध नहीं होने और पवन ऊर्जा उत्पादन में कमी के कारण राज्य को अल्पकालिक टेंडर जारी करने पड़े हैं।
मंत्री के अनुसार, तमिलनाडु खुले बाजार से पहले ही 4,500 मेगावाट बिजली खरीद चुका है। आने वाले दिनों में वास्तविक मांग और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त खरीद पर फैसला लिया जाएगा।
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