Kerala Elephant Deaths: हाथियों की मौतों पर CBI जांच की मांग, आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
केरल में जंगली हाथियों की मौतों को लेकर पर्यावरण संगठनों ने CBI जांच और हाईकोर्ट की निगरानी में SIT गठित करने की मांग की है। विशेषज्ञ समिति के अनुसार, अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच 744 हाथियों की मौत दर्ज हुई। संगठनों ने हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा और अवैध शिकार की आशंकाओं की जांच पर भी जोर दिया।
तिरुवनंतपुरम: केरल में जंगली हाथियों की मौत और उनकी अनुमानित संख्या में आई गिरावट को लेकर पर्यावरण संगठनों ने चिंता जताई है। संगठनों ने इन मामलों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और केरल हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। यह मांग पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं की तीन दिवसीय बैठक ‘वन स्पंदनम’ के दौरान उठाई गई।
केरल में हाथियों की संख्या में गिरावट के आंकड़े
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केरल में जंगली हाथियों की अनुमानित संख्या वर्ष 2005 में 5,135 थी। यह संख्या 2023 में घटकर 2,386 और 2024 में 1,793 बताई गई। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि इन आंकड़ों में बदलाव के पीछे केरल और पड़ोसी राज्यों के बीच हाथियों की आवाजाही भी एक कारण हो सकती है।
पर्यावरण संगठनों का मानना है कि इन आंकड़ों और लगातार सामने आ रहे मौत के मामलों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जानी चाहिए, ताकि हाथियों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
छह साल में 744 हाथियों की मौत दर्ज
सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति के मुताबिक, अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच केरल में 744 जंगली हाथियों की मौत दर्ज की गई। इस अवधि में औसतन हर साल करीब 124 हाथियों की मौत हुई। समिति ने वार्षिक मृत्यु दर 4.45 से 6.2 प्रतिशत के बीच होने का अनुमान भी दिया।
एक अन्य रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2026 के बीच हाथियों की 1,260 मौतें दर्ज की गईं। इनमें प्राकृतिक कारणों के साथ मानवीय गतिविधियों से जुड़ी मौतें भी शामिल हैं।
पांच जिलों में दर्ज हुए ज्यादातर मामले
हाथियों की मौत से संबंधित रिकॉर्ड की भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के जरिए मैपिंग में कुछ जिलों में अधिक मामले सामने आए। कुल 1,196 मैप किए गए रिकॉर्ड में इडुक्की जिले में सबसे ज्यादा 226 मामले दर्ज किए गए।
इसके अलावा एर्नाकुलम में 203, पलक्कड़ में 152, वायनाड में 146 और मलप्पुरम में 140 रिकॉर्ड सामने आए। इन पांच जिलों में कुल 867 रिकॉर्ड मिले, जो मैप किए गए मामलों का लगभग 72.5 प्रतिशत है। इडुक्की, एर्नाकुलम और पलक्कड़ को मिलाकर 581 रिकॉर्ड दर्ज किए गए।
ये आंकड़े मैप किए गए रिकॉर्ड पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें राज्य में हाथियों की कुल मौतों की संपूर्ण संख्या मानने से पहले संबंधित रिपोर्ट की कार्यप्रणाली और कवरेज की पुष्टि जरूरी है।
अवैध शिकार की आशंका और हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा की मांग
पर्यावरण संगठनों ने हाथियों के दांत मिलने से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए अवैध शिकार की आशंका पर चिंता जताई। हालांकि, ऐसी आशंकाओं की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है। संगठनों ने मौतों के कारणों और उनसे जुड़ी परिस्थितियों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों यानी हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित बनाने और रास्तों में मौजूद बाधाओं को हटाने पर जोर दिया गया। बैठक में इडुक्की के जिला कलेक्टर डॉ. दिनेशान चेरुवट्ट की ओर से ऐसी बाधाओं को दूर करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना भी की गई।
बैठक में जिला कलेक्टर को कथित तौर पर धमकी देने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई गई। वायनाड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एन. बदुशा ने बैठक की अध्यक्षता की।
पर्यावरण संगठनों की मांग है कि हाथियों की मौतों के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास और पारंपरिक मार्गों की सुरक्षा के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
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