UPI ने बदली भारत की डिजिटल भुगतान तस्वीर, 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा लेन-देन
भारत में डिजिटल पेमेंट का विस्तार तेजी से हुआ है और इसमें UPI की भूमिका बेहद अहम रही है। 2016 में शुरुआत के बाद UPI छोटे भुगतानों से लेकर बड़े कारोबारी लेन-देन तक आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन गया है। 2025-26 में UPI के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए। जुलाई 2026 में ही 2,365.8 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.87 लाख करोड़ रुपये रही। UPI Lite, 123PAY, AutoPay और UPI Circle जैसी सुविधाओं ने इसकी पहुंच और उपयोग के दायरे को और बढ़ाया है। भारत का यह डिजिटल पेमेंट मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है।
भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज गति से विस्तार किया है। इस बदलाव में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2016 में शुरू हुई यह भुगतान व्यवस्था अब देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुकी है और रोजमर्रा के भुगतान से लेकर कारोबारी लेन-देन तक इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
एक दशक में कई गुना बढ़ा UPI का इस्तेमाल
UPI की शुरुआत के समय इसका इस्तेमाल सीमित स्तर पर था, लेकिन धीरे-धीरे इसकी पहुंच देश के अलग-अलग हिस्सों तक बढ़ती गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 में करीब 2 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए थे। वहीं 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई।
लेन-देन की रकम में भी इसी तरह बड़ा इजाफा देखने को मिला। शुरुआती दौर में जहां UPI से जुड़े लेन-देन का मूल्य करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
जुलाई 2026 में भी जबरदस्त कारोबार
UPI के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा जुलाई 2026 के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। इस महीने देश में UPI के माध्यम से 2,365.8 करोड़ ट्रांजैक्शन किए गए। इन डिजिटल भुगतानों का कुल मूल्य करीब 29.87 लाख करोड़ रुपये रहा।
इस समय UPI नेटवर्क से 741 बैंक जुड़े हुए थे। शुरुआत में केवल 21 सदस्य बैंकों के साथ शुरू हुआ यह सिस्टम अब एक बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में बदल चुका है।
छोटे भुगतान से बड़े कारोबार तक पहुंच
UPI की सफलता का एक बड़ा कारण इसका आसान और तेज इस्तेमाल माना जाता है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल छोटी दुकानों और रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर ऑनलाइन सेवाओं तथा बड़े कारोबारी भुगतान तक होने लगा है।
UPI के अलग-अलग प्लेटफॉर्म और बैंकिंग सेवाओं के साथ जुड़ाव ने इसकी पहुंच को और बढ़ाया है। इसके कारण डिजिटल भुगतान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के छोटे शहरों और अन्य क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है।
वित्तीय समावेशन को भी मिला बढ़ावा
UPI के विस्तार के साथ कई नई सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। UPI 123PAY, UPI Lite, UPI AutoPay, UPI Circle और UPI पर क्रेडिट लाइन जैसी सुविधाओं ने अलग-अलग जरूरतों वाले लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को अधिक सुविधाजनक बनाया है।
इन सेवाओं का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना और अलग-अलग परिस्थितियों में भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना है।
विदेशों में भी बढ़ रहा UPI का इस्तेमाल
UPI की पहचान अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही है। यह प्रणाली कई विदेशी देशों में भी भुगतान और सीमा-पार रेमिटेंस के लिए उपलब्ध है। वर्तमान में 11 विदेशी देशों में UPI से जुड़ी भुगतान सुविधाएं उपलब्ध होने की बात कही गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI की बढ़ती स्वीकार्यता को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती वैश्विक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भी वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में UPI के योगदान को रेखांकित किया है।
सुरक्षा और साइबर फ्रॉड पर भी फोकस
डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। सरकार और संबंधित संस्थाएं डिजिटल फ्रॉड रोकने, उपभोक्ताओं को जागरूक करने, डेटा की सुरक्षा और पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाने पर लगातार जोर दे रही हैं।
UPI के विस्तार के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अब रोजमर्रा के आर्थिक लेन-देन के लिए डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं।
डिजिटल इंडिया की बड़ी तस्वीर
UPI की कहानी सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम के विस्तार तक सीमित नहीं है। यह भारत में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और वित्तीय सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में हुए बदलाव को भी दिखाती है।
2016-17 में कुछ करोड़ लेन-देन से शुरू हुआ UPI नेटवर्क अब हजारों करोड़ वार्षिक ट्रांजैक्शन तक पहुंच चुका है। आने वाले वर्षों में इसकी सुरक्षा, पहुंच, नई तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय इंटरऑपरेबिलिटी को और मजबूत करना डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की भूमिका को बढ़ा सकता है।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
0
Love
1
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)