विश्व कपास दिवस 2026: भारत-माली ने सतत विकास और किसानों पर की चर्चा
विश्व कपास दिवस 2026 पर भारत और माली ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें किसानों की आय, कस्तूरी कॉटन भारत पहल, कपास उत्पादकता मिशन, बाजार पहुंच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया गया।
न्यूयॉर्क: विश्व कपास दिवस के अवसर पर भारत और माली के स्थायी मिशनों ने 7 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। “कॉटन फॉर सस्टेनेबिलिटी: लाइवलीहुड्स, वैल्यू एडीशन एंड पार्टनरशिप” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कपास क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई।
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सांसदों, विभिन्न सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य कपास के माध्यम से रोजगार और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के अवसरों पर विचार करना था। वस्त्र मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कार्यक्रम की जानकारी दी।
आर्थिक विकास में कपास की अहम भूमिका
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 75/318 के जरिए 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस के रूप में मान्यता दी थी। इस दिवस का उद्देश्य आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और गरीबी उन्मूलन में कपास के योगदान को रेखांकित करना है। विकासशील और अल्पविकसित देशों के लिए कपास कृषि, रोजगार और निर्यात का महत्वपूर्ण आधार है।
भारत ने किसानों की आय और सतत उत्पादन पर दिया जोर
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कपास और चरखे को आत्मनिर्भरता, सम्मान तथा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा बताया।
उन्होंने कपास क्षेत्र के विकास के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताएं सामने रखीं। इनमें उत्पादकों की आजीविका को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच बढ़ाना, टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा देना तथा तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सशक्त बनाना शामिल रहा।
पर्वतनेनी ने कहा कि कपास उत्पादक देशों को आगे बढ़ाने के लिए किफायती कृषि संसाधनों और वित्त की उपलब्धता जरूरी है। साथ ही, छोटे उद्यमों को सहयोग देने और दक्षिण-दक्षिण तथा त्रिकोणीय सहयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि उत्पादक देश अपनी उपज से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकें।
माली ने साझेदारी और बाजार पहुंच को बताया जरूरी
संयुक्त राष्ट्र में माली के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत इस्सा कोनफूरू ने अपने देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समुदायों के लिए कपास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कपास क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों में प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी, कच्चे माल की लागत, बाजार तक सीमित पहुंच और व्यापार को प्रभावित करने वाली सहायता व्यवस्थाओं का उल्लेख किया।
कोनफूरू ने पारस्परिक लाभ पर आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का समर्थन किया। उन्होंने दक्षिण-दक्षिण सहयोग की अहमियत बताते हुए भारत को माली का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना।
कस्तूरी कॉटन भारत पहल और कपास उत्पादकता मिशन पर चर्चा
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव पद्मिनी सिंगला ने कपास के प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता के रूप में भारत की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कपास क्षेत्र छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका के लिए विशेष महत्व रखता है।
सिंगला ने कपास उत्पादकता मिशन और कस्तूरी कॉटन भारत पहल के बारे में जानकारी देते हुए उत्पादकता, गुणवत्ता और कपास की उत्पत्ति का पता लगाने की क्षमता बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने वस्त्र क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में निवेश, कारीगरों तथा छोटे उद्यमों को सहायता और टिकाऊ कपास मूल्य श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने खुले और पूर्वानुमेय व्यापार माहौल तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच को कपास क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सतत कपास क्षेत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
कार्यक्रम में हुई चर्चा से कपास उत्पादक देशों के बीच सहयोग, तकनीकी विकास, बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार तक पहुंच के महत्व को सामने रखा गया। भारत और माली की संयुक्त पहल का उद्देश्य कपास क्षेत्र से जुड़े किसानों, कारीगरों और छोटे कारोबारों के लिए अवसर बढ़ाने तथा सतत विकास को प्रोत्साहित करने पर अंतरराष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाना था।
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