AI से ज्वालामुखी विस्फोट की घंटों पहले मिल सकती है चेतावनी, शोध में बड़ा खुलासा
AI और मशीन लर्निंग की मदद से ज्वालामुखी विस्फोट की चेतावनी घंटों पहले मिल सकती है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के शोध में सामने आया कि भूकंपीय गतिविधियों में सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर संभावित विस्फोट का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि इससे फॉल्स अलार्म बढ़ सकते हैं, लेकिन समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों की जान बचाने और सुरक्षित निकासी में मदद मिल सकती है।
ज्वालामुखी विस्फोट से पहले चेतावनी देने वाली तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के एक शोध के मुताबिक, मशीन लर्निंग मॉडल ज्वालामुखी के आसपास होने वाली बेहद सूक्ष्म भूकंपीय गतिविधियों में बदलाव पहचानकर संभावित विस्फोट की जानकारी कई घंटे पहले दे सकता है।
व्हाइट आइलैंड हादसे ने बढ़ाई चिंता
दिसंबर 2019 में न्यूजीलैंड के व्हाकारी/व्हाइट आइलैंड पर अचानक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था। इस घटना में 22 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। यह हादसा अचानक होने वाले ज्वालामुखी विस्फोटों से जुड़े खतरे को सामने लाने वाली प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा।
शोधकर्ताओं ने बताया कि न्यूजीलैंड में पिछले दो दशकों के दौरान भी अचानक ज्वालामुखीय गतिविधियों की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन परिस्थितियों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बड़ी चुनौती रहा है।
मशीन लर्निंग से मिले शुरुआती संकेत
अध्ययन में न्यूजीलैंड, जापान, चिली और रूस के पांच ज्वालामुखियों से वर्षों के भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। मशीन लर्निंग मॉडल को इस तरह तैयार किया गया कि वह अगले 48 घंटों में संभावित विस्फोट की संभावना का अनुमान लगा सके।
व्हाकारी से जुड़े परीक्षण में मॉडल ने ऐसे आंकड़ों पर भी पांच में से चार विस्फोटों के संकेत पहले पहचान लिए, जिनका इस्तेमाल प्रशिक्षण के दौरान नहीं हुआ था।
फॉल्स अलार्म भी बड़ी चुनौती
जल्दी चेतावनी देने वाले सिस्टम के साथ गलत अलार्म का खतरा भी रहता है। अध्ययन में मॉडल ने ऐसे कई मौके भी दिखाए जब चेतावनी जारी हुई लेकिन विस्फोट नहीं हुआ।
हालांकि शोधकर्ताओं का तर्क है कि आपदा की स्थिति में कुछ अतिरिक्त चेतावनियों की कीमत समय रहते लोगों को सुरक्षित निकालने से मिलने वाले फायदे से कम हो सकती है। उनका मानना है कि कुछ परिस्थितियों में अधिक संवेदनशील चेतावनी प्रणाली ज्यादा सुरक्षित साबित हो सकती है।
आर्थिक नुकसान और मानव जीवन के बीच संतुलन
ज्वालामुखी की आशंका में किसी पर्यटन स्थल या स्की रिसॉर्ट को बंद करने से कारोबार प्रभावित हो सकता है। लेकिन समय रहते लोगों को हटाने से संभावित मौतों और गंभीर चोटों को रोकने में मदद मिल सकती है।
शोध में इसी वजह से चेतावनी प्रणाली के मूल्यांकन में केवल गलत अलार्म की संख्या नहीं, बल्कि समय पर कार्रवाई से बचाए जा सकने वाले नुकसान को भी शामिल करने की जरूरत बताई गई है।
विशेषज्ञों की जगह नहीं लेगा AI
शोधकर्ताओं के अनुसार, AI आधारित सिस्टम का उद्देश्य ज्वालामुखी विशेषज्ञों की भूमिका खत्म करना नहीं है। यह वास्तविक समय के निगरानी आंकड़ों का विश्लेषण करके शुरुआती संकेत दे सकता है, जिसके बाद विशेषज्ञ स्थिति का आकलन कर आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
ऐसी तकनीक ज्वालामुखी के आसपास मौजूद लोगों, पर्यटन स्थलों, ट्रैकिंग मार्गों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में मदद कर सकती है।
शुरुआती चेतावनी से बढ़ सकती है सुरक्षा
शोध का मुख्य निष्कर्ष यह है कि अचानक होने वाले ज्वालामुखी विस्फोटों के मामलों में पूरी तरह निश्चित होने का इंतजार जोखिम बढ़ा सकता है। कुछ अतिरिक्त फॉल्स अलार्म स्वीकार करके लोगों को खतरे से बाहर निकलने के लिए ज्यादा समय दिया जा सकता है।
यह विचार आपदा प्रबंधन में शुरुआती चेतावनी प्रणालियों के महत्व को भी रेखांकित करता है।
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