Ashok Singhal Birth Centenary 2026: पीएम मोदी ने किया नमन
पीएम मोदी ने अशोक सिंहल की जन्मशती पर उनके जीवन और राष्ट्रसेवा से जुड़े योगदान को याद किया। उन्होंने सिंहल के संगठनात्मक कौशल, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्मशती के अवसर पर उनके जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को याद किया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अशोक सिंहल के जीवन और विचारों को समर्पित अपना विशेष आलेख साझा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उनके आध्यात्मिक समर्पण, संगठनात्मक कार्य और सामाजिक एकता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में अशोक सिंहल के व्यक्तित्व को दृढ़ संकल्प, सादगी और सेवा भावना से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक एकता के लिए उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।
सेवा और लोककल्याण को समर्पित रहा जीवन
प्रधानमंत्री ने अपने आलेख की शुरुआत एक प्रसिद्ध सुभाषित से की, जिसमें पेड़, नदी और संत के माध्यम से परोपकार और सेवा का संदेश दिया गया है। उन्होंने लिखा कि अशोक सिंहल का जीवन भी दूसरों के कल्याण और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा।
पीएम मोदी ने उनके साथ जुड़े अपने पुराने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने 1981 का एक प्रसंग याद करते हुए बताया कि उस समय एक युवा कार्यकर्ता के रूप में उन्हें अशोक सिंहल का हाथ से लिखा पत्र मिला था। इसमें एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई थी।
कठिन परिस्थितियों में भी सक्रिय रहे
प्रधानमंत्री के अनुसार, अशोक सिंहल ने दशकों तक लगातार संगठनात्मक कार्य किया और देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं कीं। गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में जाना उन्हें विशेष रूप से पसंद था। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी वे राहत और सेवा कार्यों में सक्रिय रहते थे।
पीएम मोदी ने 2001 के कच्छ भूकंप से जुड़ी अपनी स्मृतियों को भी लेख में साझा किया और उस दौर में अशोक सिंहल के साथ बिताए समय को याद किया।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिवेश का प्रभाव
अशोक सिंहल का संबंध एक प्रतिष्ठित परिवार से था, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनके जीवन में शुरुआती दौर से ही सेवा और करुणा की भावना का उल्लेख किया। प्रयागराज में संगम तट पर समय बिताना और साधु-संतों के साथ उनका संपर्क उनके व्यक्तित्व और सांस्कृतिक दृष्टिकोण के विकास में महत्वपूर्ण रहा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिवेश ने उनके जीवन की दिशा को प्रभावित किया और उन्हें संगठनात्मक कार्यों से जोड़ने में भूमिका निभाई।
संगठन निर्माण और राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंहल की संगठनात्मक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न संस्थाओं और अभियानों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और संगठन के प्रति सक्रियता का भी उन्होंने उल्लेख किया।
लेख में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े अशोक सिंहल के योगदान को भी याद किया गया। प्रधानमंत्री ने 1991 की बोट क्लब रैली और उस दौरान उनके संबोधन का उल्लेख करते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े लंबे आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
सामाजिक समानता पर भी दिया जोर
प्रधानमंत्री के लेख में अशोक सिंहल के सामाजिक समरसता से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख है। अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के लिए कामेश्वर चौपाल को चुने जाने और काशी में डोम राजा को सम्मान दिए जाने जैसे प्रसंगों का जिक्र किया गया।
इसके अलावा शिक्षा, विशेषकर वैदिक शिक्षा, और संगीत के प्रति अशोक सिंहल की रुचि को भी प्रधानमंत्री ने याद किया। वे एकल विद्यालय जैसी पहल से जुड़े रहे और संगीत में भी उनकी रुचि थी।
युवाओं तक पहुंचाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने अपने आलेख के अंत में कहा कि अशोक सिंहल ने अपने जीवन में राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया। उनकी जन्मशती के अवसर पर पीएम मोदी ने अधिक से अधिक युवाओं को उनके जीवन, विचारों और योगदान से परिचित कराने की बात कही।
अशोक सिंहल की जन्मशती के अवसर पर प्रधानमंत्री का यह आलेख उनके संगठनात्मक जीवन, सेवा कार्यों, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखता है।
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