CDSCO की चेतावनी: दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं का बिना सलाह इस्तेमाल खतरनाक
CDSCO ने दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं के अनुचित इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की है। नियामक ने डॉक्टर की पर्ची के बिना इन दवाओं के बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल को लेकर आम लोगों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को सावधान किया है। दवा नियामक ने कहा है कि इन दवाओं का अनुचित या लंबे समय तक इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकता है, जिसमें गुर्दे से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी शामिल है।
21 सितंबर को जारी परिपत्र में CDSCO ने नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) और एंटीबायोटिक्स के सुरक्षित, तर्कसंगत और जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया है। नियामक ने लोगों से डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का इस्तेमाल करने से बचने की अपील की है।
भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी परिपत्र में बताया गया कि देश में दवाओं के आयात, निर्माण, बिक्री और वितरण से संबंधित गतिविधियां औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार संचालित होती हैं।
डॉक्टर की पर्ची जरूरी
CDSCO के अनुसार NSAIDs और एंटीबायोटिक्स सहित संबंधित दवाओं की बिक्री और वितरण निर्धारित चिकित्सकीय पर्ची के आधार पर ही किया जाना चाहिए। नियामक ने दवा विक्रेताओं और वितरकों को प्रिस्क्रिप्शन संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
दवा नियामक ने बताया कि संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए कई दवाओं को औषधि नियमावली, 1945 की अनुसूची G, H, H1 और X के अंतर्गत रखा गया है। इन दवाओं का इस्तेमाल उचित चिकित्सकीय निगरानी में किया जाना आवश्यक है।
विशेष रूप से अधिकांश एंटीबायोटिक दवाएं अनुसूची H1 के अंतर्गत आती हैं। इन दवाओं पर यह चेतावनी भी दर्ज होती है कि चिकित्सकीय सलाह के बिना इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बार-बार या लंबे समय तक दवा लेने से बचें
CDSCO ने आम जनता से कहा है कि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल न करें। दवा की जरूरत, मात्रा और अवधि का निर्धारण डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
इसके अलावा नियामक ने दवा विक्रेताओं और वितरकों को अनुसूची H और H1 के तहत आने वाली दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रण अधिकारियों से भी लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और नियमों के अनुपालन की निगरानी करने को कहा गया है।
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