भारत-EFTA समझौते से 20 लाख रोजगार की संभावना, 100 अरब डॉलर निवेश
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते से 2040 तक 10 लाख से 20 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है। एसोचैम के अनुसार, EFTA देशों ने 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। समझौते से फार्मा, कपड़ा, इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, AI और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है।
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) से वर्ष 2040 तक देश में 10 लाख से 20 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। उद्योग मंडल एसोचैम के मुताबिक, इस समझौते से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलने, विदेशी निवेश बढ़ने और नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
भारत-EFTA समझौते के एक वर्ष पूरा होने पर जारी बयान में एसोचैम ने कहा कि समझौते के तहत EFTA देशों ने 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें शुरुआती 10 वर्षों के दौरान 50 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य शामिल है।
निवेश को परियोजनाओं और रोजगार में बदलने की चुनौती
एसोचैम ने कहा कि समझौते से मिलने वाले लाभों को वास्तविक निवेश परियोजनाओं, विनिर्माण इकाइयों, स्वच्छ ऊर्जा पहलों और रोजगार के अवसरों में बदलना महत्वपूर्ण होगा। उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन को इस दिशा में संभावनाशील क्षेत्र माना गया है।
EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। एसोचैम के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन के नए अवसर भी उपलब्ध करा सकती है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि समझौते के तहत प्रस्तावित 100 अरब डॉलर के निवेश और रोजगार से जुड़े लक्ष्यों को ठोस परियोजनाओं में बदलना अगला अहम कदम होगा। उन्होंने उन्नत विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी इन अवसरों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
भारतीय निर्यातकों को बड़े बाजार तक पहुंच का अवसर
एसोचैम के बयान के मुताबिक, TEPA भारतीय निर्यातकों के लिए EFTA देशों के बाजारों में पहुंच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। समझौते के तहत EFTA ने अपनी 92.2 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों में शुल्क रियायतों की पेशकश की है। इससे भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को बाजार पहुंच मिलने की संभावना जताई गई है।
उद्योग मंडल का मानना है कि फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, आभूषण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं, भारत ने डेयरी, सोया और कोयले जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रावधान किए हैं।
बयान में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 26.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है। एसोचैम के अनुसार, EFTA देशों का वैश्विक आयात सालाना लगभग 628 अरब डॉलर है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए विस्तार की संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
रसायन, फार्मा और मशीनरी में भी संभावनाएं
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि EFTA देशों के जैविक रसायनों के आयात में भारत की 8.9 प्रतिशत हिस्सेदारी दोनों पक्षों के बीच व्यापार की संभावनाओं को दर्शाती है। उनके मुताबिक, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, बिजली के उपकरण, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण और कपड़ा क्षेत्र में भी इसी तरह विस्तार की गुंजाइश है।
उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों को कृषि उत्पादों, समुद्री खाद्य पदार्थों, कॉफी और मसालों के निर्यात से लाभ मिल सकता है। समझौते से बड़े उद्योगों के अलावा MSME, स्टार्टअप और किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग
ग्रीन हाइड्रोजन को भारत-EFTA सहयोग के उभरते क्षेत्रों में शामिल किया गया है। बयान में भारत के वर्ष 2030 तक सालाना कम से कम 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लक्ष्य का उल्लेख किया गया है।
एसोचैम के अनुसार, नॉर्वे की समुद्री प्रौद्योगिकी, आइसलैंड की भू-तापीय ऊर्जा विशेषज्ञता और स्विट्जरलैंड की इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।
AI, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण पर भी नजर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण को भी भारत-EFTA साझेदारी के महत्वपूर्ण संभावित क्षेत्र बताया गया है। एसोचैम के मुताबिक, भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, सेमीकॉन इंडिया 2.0 और इंडिया AI मिशन, सटीक इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन में EFTA देशों की विशेषज्ञता के साथ सहयोग का आधार बन सकते हैं।
उद्योग मंडल के अनुसार, समझौते का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेश की प्रतिबद्धताएं किस हद तक ठोस परियोजनाओं, निर्यात वृद्धि और रोजगार के अवसरों में बदलती हैं।
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