निर्मला सीतारमण की JBIC गवर्नर से मुलाकात, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर पर चर्चा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक-IMF की वार्षिक बैठकों के दौरान JBIC गवर्नर काजुहिको अमाकावा से मुलाकात की। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, महत्वपूर्ण खनिजों और डेटा सेंटर निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में जापानी निवेश बढ़ाने का भी आग्रह किया।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की वार्षिक बैठकों के दौरान जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर काजुहिको अमाकावा से मुलाकात की। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत विनिर्माण सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में भारत-जापान सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
वित्त मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा जानकारी के मुताबिक, दोनों पक्षों ने ऊर्जा परिवर्तन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के विकास जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। बातचीत में 600 मिलियन डॉलर के भारत-जापान फंड और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) में जापानी भागीदारी का मुद्दा भी शामिल रहा।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायोएथेनॉल में निवेश पर चर्चा
बैठक के दौरान JBIC गवर्नर काजुहिको अमाकावा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायोएथेनॉल के क्षेत्र में भारत-जापान फंड के अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने भविष्य में एक नए फंड की संभावना को लेकर भी उम्मीद जताई।
अमाकावा ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) में JBIC की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि जापानी कंपनियों की भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग में दिलचस्पी बढ़ रही है। गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में निवेश के अवसरों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में भी संभावनाओं पर चर्चा हुई।
विशाखापत्तनम जैसे शहरों में डेटा सेंटर लगाने की अपील
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जापानी कंपनियों से विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। इसका उद्देश्य बड़े महानगरों के अलावा अन्य शहरों में भी निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करना है।
बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और जापान के आर्थिक एवं वित्तीय संबंधों को और मजबूत बनाने की संभावनाओं पर सहमति जताई। साथ ही, दोनों देशों के अनुभवों से सीखने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के महत्व पर भी चर्चा हुई।
शहरी और जल बुनियादी ढांचे में निजी निवेश पर जोर
JBIC गवर्नर से मुलाकात से पहले वित्त मंत्री ने विश्व बैंक-IMF की वार्षिक बैठकों के इतर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का विषय था—शहरों को निवेश के अनुकूल बनाना और शहरी एवं जल बुनियादी ढांचे के लिए निजी पूंजी जुटाना।
इस दौरान उन्होंने भारत में चल रहे शहरी विकास कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे में निवेश की संभावनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
IMF की सहायता प्रक्रिया में सुधार की जरूरत बताई
अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में निर्मला सीतारमण ने मध्यम आय वाले देशों के सामने आने वाली भुगतान संतुलन (Balance of Payments) संबंधी चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कई देशों को अचानक गंभीर वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है और ऐसी स्थिति में उन्हें IMF की सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
वित्त मंत्री ने सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में समयबद्धता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संकट का समाधान कई वर्षों तक लंबित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, कुछ देशों को सहायता की जरूरत होने के बावजूद तीन से चार वर्षों तक समाधान नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि इस तरह की कमियों को दूर करने के लिए सुधार किए जा रहे हैं।
भारत-जापान की यह बातचीत स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ निवेश के अवसरों को व्यापक बनाने पर केंद्रित रही।
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