रूसी डीजल आयात पर ट्रंप को चुनौती, अमेरिकी सांसदों ने पेश किया विधेयक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से रूसी डीजल आयात को दी गई छूट के खिलाफ डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों ने रॉनल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट ऑफ 2026 पेश किया है। विधेयक में जनरल लाइसेंस 135 को निष्प्रभावी करने, भविष्य में ऐसी छूटों पर रोक लगाने और यूक्रेन को खुफिया सहायता से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। फिलहाल यह प्रस्तावित विधेयक है।

Oct 29, 2026 - 18:15
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रूसी डीजल आयात पर ट्रंप को चुनौती, अमेरिकी सांसदों ने पेश किया विधेयक

अमेरिका में रूसी डीजल के आयात को अनुमति देने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के फैसले पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर एक विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर लगी रोक को प्रशासनिक छूट के जरिए कमजोर होने से रोकना है। सांसदों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था वर्ष 2022 में बनाए गए प्रतिबंध संबंधी कानून की भावना के विपरीत है।

इस विधेयक का नाम ‘रॉनल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट ऑफ 2026’ रखा गया है। इसे 22 अक्टूबर को प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया था। <Cite refs={["turn674668search0","turn674668search1"]} />

तीन सांसदों ने मिलकर पेश किया प्रस्ताव

इस विधेयक को वॉशिंगटन राज्य की डेमोक्रेट सांसद मैरी ग्लूसेनकैंप पेरेज, पेंसिल्वेनिया के रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक और नेब्रास्का के रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने पेश किया है। इस पहल का उद्देश्य रूसी मूल के डीजल के आयात से संबंधित अमेरिकी वित्त मंत्रालय की सामान्य अनुमति को निष्प्रभावी करना और भविष्य में ऐसी छूट जारी करने पर रोक लगाना है।

विधेयक में रूस से ऊर्जा उत्पादों के आयात को मंजूरी देने वाली जनरल लाइसेंस 135 को रद्द करने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त मंत्रालय को ऐसे समझौतों पर सरकारी धन खर्च करने से रोकने की बात कही गई है, जो रूसी तेल आयात प्रतिबंध कानून का उल्लंघन करते हों। <Cite refs={["turn674668search1","turn674668search2"]} />

यूक्रेन को खुफिया सहायता देने पर भी जोर

प्रस्ताव में यूक्रेन की रक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया सहायता जारी रखने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। इसके तहत खुफिया एजेंसियों को सहायता में किसी भी व्यवधान की स्थिति में 24 घंटे के भीतर कांग्रेस की संबंधित खुफिया समितियों को सूचित करना होगा।

सांसदों का कहना है कि रूस से ऊर्जा उत्पादों की खरीद की अनुमति देने से मॉस्को को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनका तर्क है कि इससे यूक्रेन के समर्थन और रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की अमेरिकी नीति के बीच विरोधाभास पैदा होता है।

सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के फैसले पर उठाए सवाल

मैरी ग्लूसेनकैंप पेरेज ने आरोप लगाया कि रूसी डीजल के आयात की अनुमति कांग्रेस की द्विदलीय सहमति और 2022 के कानून के उद्देश्य को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ईंधन की कीमतें कम करना चाहता है, तो उसे मध्य पूर्व के संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों पर ध्यान देना चाहिए, न कि रूस को अतिरिक्त राजस्व मिलने देना चाहिए।

ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने कहा कि कांग्रेस ने 2022 में रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला व्यापक द्विदलीय समर्थन के साथ किया था। उनके अनुसार, प्रशासनिक छूट के जरिए उस फैसले के उद्देश्य को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, डॉन बेकन ने ट्रंप के पहले के रुख का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति पहले यूरोपीय देशों की रूसी ऊर्जा खरीद की आलोचना करते रहे हैं, जबकि अब उनका प्रशासन रूसी डीजल की बिक्री और आयात को आसान बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। <Cite refs={["turn674668search0","turn674668search2"]} />

ईंधन की कीमतों और रूस नीति के बीच विवाद

यह विधेयक ऐसे समय में आया है, जब मध्य पूर्व के संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों के बीच ईंधन की कीमतों को लेकर अमेरिकी प्रशासन पर दबाव है। ट्रंप प्रशासन ने रूसी डीजल से संबंधित लेनदेन के लिए छूट दी है, जबकि आलोचक आशंका जता रहे हैं कि इससे रूस को आर्थिक फायदा हो सकता है।

रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस समेत कुछ अन्य सांसद भी रूसी डीजल समझौते और मौजूदा प्रतिबंध कानून के बीच संभावित टकराव पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, प्रस्तावित विधेयक का भविष्य कांग्रेस में आगे की प्रक्रिया और मतदान पर निर्भर करेगा।

भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों पर भी नजर

इस घटनाक्रम का महत्व भारत के लिए भी है। अमेरिका भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने की अपेक्षा जताता रहा है, जबकि भारत ने पश्चिमी देशों की ओर से रूसी ऊर्जा के व्यापार को लेकर अपनाए जाने वाले रुख पर सवाल उठाए हैं।

रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों और शुल्क संबंधी नीतियों का असर भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में वॉशिंगटन में रूसी ऊर्जा आयात को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर भारत सहित अन्य प्रमुख ऊर्जा खरीदारों की नजर बनी रह सकती है।

विधेयक की स्थिति: 22 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया प्रस्ताव; इसे कानून बनने के लिए आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। <Cite refs={["turn674668search1","turn674668search5","turn674668search10"]} />

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