भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार, दूसरी तिमाही में 7.35% GDP ग्रोथ का अनुमान

वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.35% रहने का अनुमान है। औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण गतिविधियों और निर्यात में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और खरीफ फसल से जुड़ी अनिश्चितताएं चुनौती बनी हुई हैं।

Oct 29, 2026 - 18:41
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भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार, दूसरी तिमाही में 7.35% GDP ग्रोथ का अनुमान

भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत बने हुए हैं। वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की जुलाई-सितंबर तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान है। औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा खपत, बंदरगाहों पर गतिविधियों, जीएसटी संग्रह और ऑटोमोबाइल बिक्री में मजबूती को इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। हालांकि, महंगे कच्चे तेल, खाद्य महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत भी बताई गई है। <Cite refs={["turn199652search0","turn199652search2"]} />

नाउकास्टिंग मॉडल से 7.35% वृद्धि का अनुमान

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8% रही थी। इसके बाद आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पेश किए गए नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर दूसरी तिमाही में 7.35% वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

नाउकास्टिंग मॉडल उपलब्ध आर्थिक संकेतकों के आधार पर चालू अवधि की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाता है। इसलिए 7.35% का आंकड़ा फिलहाल अनुमान है, अंतिम GDP परिणाम नहीं।

मंत्रालय ने कहा कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन में मजबूती से आर्थिक विस्तार को समर्थन मिल रहा है। <Cite refs={["turn199652search0","turn199652search2"]} />

औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण में तेजी

औद्योगिक क्षेत्र से मिले आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत दे रहे हैं। अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8% की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें विनिर्माण क्षेत्र का योगदान प्रमुख रहा, जिसका उत्पादन 9% बढ़ा।

सितंबर में आठ प्रमुख उद्योगों के संयुक्त सूचकांक यानी इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) में सालाना आधार पर 7.9% की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा अनंतिम है।

विनिर्माण क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में भी विस्तार देखने को मिला। एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI सितंबर में बढ़कर 55.1 पर पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 52.8 था। PMI का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार का संकेत माना जाता है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने और तकनीकी क्षमताओं के विकास पर जोर देना आगे भी महत्वपूर्ण रहेगा।

निर्यात में 11% की वृद्धि

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद सितंबर 2026 में भारत के कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात में सालाना आधार पर 11% की वृद्धि दर्ज की गई। वस्तुओं के निर्यात में 23.1% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों की अहम भूमिका रही।

समीक्षा में कहा गया कि घरेलू उत्पादन का विस्तार करने के साथ-साथ स्थानीय मूल्य संवर्धन बढ़ाना, आपूर्ति शृंखला मजबूत करना और भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बनाए रखना जरूरी है।

इन प्रयासों से निर्यात को दीर्घकालिक समर्थन मिलने और वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर

भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार से भी समर्थन मिला है। 16 अक्टूबर 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 721 अरब डॉलर था।

विदेशी मुद्रा भंडार में पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक वित्तीय उतार-चढ़ाव के दौरान बाहरी भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में मदद करती है।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में बदलाव से भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।

बैंक ऋण में वृद्धि, वित्तीय बाजारों पर नजर

वित्तीय क्षेत्र में भी गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। समीक्षा में बैंक ऋण में सालाना आधार पर 21.6% की वृद्धि का उल्लेख किया गया। इसके अलावा, मनी मार्केट में कामकाज सुचारू रहने और बाजार दरों के नीतिगत रेपो रेट के आसपास बने रहने की बात कही गई।

खुले बाजार परिचालन (OMO) के माध्यम से नकदी की स्थिति को प्रबंधित किया गया। वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय वित्तीय बाजारों पर असर सीमित रहने का आकलन किया गया।

मजबूत ऋण प्रवाह कारोबार, निवेश और घरेलू मांग को सहारा दे सकता है। हालांकि, वैश्विक ब्याज दरों और ऊर्जा कीमतों में बदलाव पर आगे भी नजर रखना जरूरी होगा।

महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें बनी चुनौती

वित्त मंत्रालय ने आर्थिक वृद्धि के सकारात्मक संकेतों के साथ कुछ जोखिमों को भी रेखांकित किया है। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और खरीफ फसल के उत्पादन को लेकर अनिश्चितता आने वाले महीनों में नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के साथ कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। महंगाई के दूसरे दौर के प्रभावों को नियंत्रित करने में मौद्रिक नीति और नकदी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

कुल मिलाकर, अक्टूबर की समीक्षा में घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों, निर्यात और ऋण वृद्धि को अर्थव्यवस्था के लिए सहायक कारक बताया गया है। वहीं, वैश्विक तनाव, ऊर्जा की कीमतों और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बीच विकास की रफ्तार बनाए रखना नीति-निर्माताओं के लिए अहम चुनौती रहेगा।

स्रोत: वित्त मंत्रालय की अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा और संबंधित आर्थिक रिपोर्टें। <Cite refs={["turn199652search0","turn199652search2","turn199652search3"]} />

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