भारत में दो साल में बन सकता है पहला स्वदेशी नागरिक विमान, नायडू ने जताई उम्मीद
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि संयुक्त उद्यम के माध्यम से भारत में दो साल के भीतर पहला स्वदेशी नागरिक विमान तैयार करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने विमानन क्षेत्र में विनिर्माण, कौशल विकास और विमान इंजन निर्माण की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
भारत के नागरिक विमानन क्षेत्र में आने वाले वर्षों में बड़े विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि संयुक्त उद्यम के जरिए अगले दो वर्षों में भारत में निर्मित पहला स्वदेशी नागरिक विमान तैयार किया जा सकता है।
नई दिल्ली में इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट की एक संगोष्ठी में बोलते हुए नायडू ने बताया कि भारतीय विमानन कंपनियों ने 1,600 से अधिक विमानों के ऑर्डर दिए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 100 अरब डॉलर बताई गई है। उन्होंने कहा कि अगले एक दशक में देश में 100 से अधिक नए हवाई अड्डे विकसित होने की उम्मीद है।
मंत्री के अनुसार, भारत में इस समय करीब 165 हवाई अड्डे हैं, जबकि घरेलू विमानन कंपनियों के बेड़े में लगभग 850 विमान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और इसके साथ उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण तथा कुशल मानव संसाधन की जरूरत भी बढ़ेगी।
नायडू ने विमानन क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री और कर्मचारियों के कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने पर ध्यान दे रही है, जो देश में उच्चस्तरीय विमानन विनिर्माण को प्रोत्साहित कर सकें।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि बोइंग और एयरबस फिलहाल भारत से करीब 4 अरब डॉलर मूल्य के कलपुर्जे और सेवाएं लेते हैं। सरकार को उम्मीद है कि दशक के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
विमान इंजन निर्माण पर भी विचार
नायडू ने कहा कि सरकार भारत में विमान इंजन निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में क्षमता विकसित करने में लंबा समय लग सकता है।
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पर फोकस
विमानन क्षेत्र में पर्यावरणीय स्थिरता को लेकर भी मंत्री ने भारत की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का प्रमुख निर्यातक बनने की क्षमता है।
इसके साथ ही सरकार एक कार्बन क्रेडिट व्यवस्था विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य उद्योगों को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
नायडू ने टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ टी. वी. नरेंद्रन के साथ आयोजित एक सत्र में विमानन क्षेत्र के भविष्य, विनिर्माण क्षमता और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
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