भारत के ग्रीन शिपिंग मिशन को मिलेगी रफ्तार, सर्बानंद सोनोवाल ने टेरी में की अहम समीक्षा
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुग्राम स्थित टेरी परिसर का दौरा कर भारत में ग्रीन शिपिंग से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर, वैकल्पिक ईंधन, ग्रीन बंकरिंग हब और तटवर्ती विद्युत आपूर्ति जैसी पहलों पर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम कर भारत को स्वच्छ और भविष्य के लिए तैयार समुद्री शक्ति बनाना है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित टेरी के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने देश में ग्रीन शिपिंग को बढ़ावा देने और समुद्री क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन घटाने से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
समीक्षा के दौरान ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर, वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल के लिए बंदरगाहों की तैयारी, ग्रीन बंकरिंग हब और तटवर्ती विद्युत आपूर्ति जैसी परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में स्वच्छ और कम-कार्बन वाले समुद्री परिवहन की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
सोनोवाल ने कहा कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने बंदरगाहों को भविष्य में इस्तेमाल होने वाले स्वच्छ ईंधनों के लिए तैयार करने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। इस दिशा में अनुसंधान संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और समुद्री उद्योग के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया गया।
बैठक में ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की ओर से चल रही परियोजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी दी गई। वहीं, कम और शून्य उत्सर्जन वाले शिपिंग कॉरिडोर विकसित करने को लेकर भी प्रस्तुति दी गई।
देश के कुछ प्रमुख बंदरगाहों में ग्रीन बंकरिंग हब विकसित करने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। दीनदयाल पोर्ट, पारादीप पोर्ट और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट से जुड़ी पहलों के बारे में अधिकारियों ने जानकारी साझा की।
तटवर्ती विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को भी स्वच्छ समुद्री परिवहन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत बंदरगाह पर खड़े जहाज अपने इंजन चलाने के बजाय तट से बिजली ले सकते हैं, जिससे ईंधन की खपत और उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है।
सोनोवाल ने कहा कि ग्रीन बंकरिंग, वैकल्पिक ईंधन, तटवर्ती बिजली और ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर जैसी पहल भारत के समुद्री क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद करेंगी। उन्होंने सभी संबंधित संस्थानों और उद्योगों से मिलकर इस दिशा में तेजी से काम करने का आह्वान किया।
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