म्यूल अकाउंट बन रहे साइबर ठगी का नया रास्ता, AI और सख्त KYC से रोकने की तैयारी

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम को दूसरे खातों में भेजा जाता है। जानें AI, MuleHunter, FRI और KYC से कैसे ऐसे खातों की पहचान हो रही है।

Aug 30, 2026 - 14:38
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म्यूल अकाउंट बन रहे साइबर ठगी का नया रास्ता, AI और सख्त KYC से रोकने की तैयारी

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अपराधी ठगी की रकम को सीधे अपने खाते में रखने के बजाय कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इनका इस्तेमाल रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी को छिपाने के लिए किया जा सकता है।

खास बात यह है कि कई बार जिस व्यक्ति के खाते में संदिग्ध रकम पहुंचती है, उसे इसकी जानकारी नहीं होती। इसके बावजूद जांच के दौरान उसका बैंक खाता फ्रीज हो सकता है और उसे संबंधित लेनदेन के बारे में अधिकारियों को जवाब देना पड़ सकता है।

ज्वेलरी खरीद के मामले से समझें खतरा

एक मामले में कुछ लोगों ने एक ज्वेलर से करीब 40 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी। उन्होंने 2 लाख रुपये नकद दिए और बाकी 38 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए भेजने की बात कही। बैंक खाते में रकम आने और ट्रांजेक्शन की पुष्टि के बाद ज्वेलर ने सामान सौंप दिया।

बाद में जांच में सामने आया कि खाते में पहुंची रकम कथित तौर पर साइबर ठगी से संबंधित थी। इसके बाद ज्वेलर का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया। यह मामला बताता है कि किसी व्यक्ति के खाते में अनजाने में संदिग्ध रकम आने पर भी उसे जांच का सामना करना पड़ सकता है।

संदिग्ध लेनदेन पकड़ने में AI की मदद

म्यूल अकाउंट के इस्तेमाल को रोकने के लिए बैंक और संबंधित एजेंसियां अब तकनीकी प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रही हैं। लेनदेन के असामान्य पैटर्न, अचानक बढ़ी रकम और अलग-अलग खातों के बीच लगातार होने वाले ट्रांसफर जैसी गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है।

इससे ऐसे खातों और नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिल सकती है जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को आगे भेजने के लिए किया जा रहा हो।

Financial Fraud Risk Indicator से संदिग्ध नंबरों पर नजर

दूरसंचार विभाग की Financial Fraud Risk Indicator (FRI) व्यवस्था वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल नंबरों के जोखिम का आकलन करने में मदद करती है। जोखिम के आधार पर नंबरों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जा सकता है।

इससे संबंधित जानकारी बैंक, पेमेंट प्लेटफॉर्म और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझा की जा सकती है, ताकि संदिग्ध नंबरों से जुड़े लेनदेन पर समय रहते चेतावनी मिल सके।

MuleHunter से संदिग्ध खातों की पहचान

RBI Innovation Hub की ओर से विकसित ‘MuleHunter’ एआई आधारित प्रणाली बैंकिंग लेनदेन में ऐसे पैटर्न खोजने में मदद करती है, जो किसी खाते के म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल होने का संकेत दे सकते हैं।

अचानक लेनदेन बढ़ना, कई खातों में बार-बार पैसे भेजना, लंबे समय से निष्क्रिय खाते में अचानक बड़ी गतिविधि होना और संदिग्ध लॉगिन जैसी गतिविधियों को जांच के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

KYC प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर

म्यूल अकाउंट के नेटवर्क को रोकने के लिए बैंकिंग प्रणाली में KYC प्रक्रिया को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहचान और पते का उचित सत्यापन, वीडियो KYC तथा अन्य सत्यापन उपाय फर्जी खातों के इस्तेमाल की संभावना कम कर सकते हैं।

जांच के दौरान यदि किसी बैंक शाखा या बिचौलिए से बड़ी संख्या में संदिग्ध खाते जुड़े मिलते हैं, तो खाता खोलने और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच की जा सकती है।

बैंक ग्राहकों को भी रहना होगा सावधान

लोगों को अपने बैंक खातों में होने वाले लेनदेन पर नियमित नजर रखनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति को बैंकिंग पासवर्ड, OTP, कार्ड की जानकारी, चेकबुक, डेबिट कार्ड, सिम या अन्य संवेदनशील जानकारी नहीं देनी चाहिए।

यदि खाते में किसी अनजान स्रोत से पैसा आ जाए, तो उसे तुरंत निकालने या किसी दूसरे खाते में भेजने के बजाय बैंक से संपर्क करना बेहतर है। संदिग्ध रकम को आगे ट्रांसफर करने से व्यक्ति खुद भी जांच के दायरे में आ सकता है।

साइबर ठगी की स्थिति में 1930 पर करें शिकायत

साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत की जा सकती है। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

समय पर शिकायत मिलने से संबंधित एजेंसियों को संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई करने और रकम की आगे की आवाजाही रोकने में मदद मिल सकती है।

AI और KYC के जरिए नेटवर्क पर शिकंजा

म्यूल अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को कई खातों के बीच घुमाने का माध्यम बन सकते हैं। ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए मजबूत KYC, लेनदेन की निगरानी, वित्तीय खुफिया जानकारी और AI आधारित तकनीकों का संयुक्त इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है।

साथ ही, आम बैंक ग्राहकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। किसी अनजान स्रोत से खाते में आई रकम को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत बैंक को सूचना देना संभावित कानूनी और वित्तीय परेशानी से बचने में मदद कर सकता है।

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