बाघ बहुल क्षेत्रों को आजीविका और आय का आधार बनाने पर जोर, भूपेंद्र यादव ने कार्यशाला का किया उद्घाटन
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में बाघ बहुल क्षेत्रों में संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था और इको-टूरिज्म के जरिए आजीविका बढ़ाने पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान IBCA और ADB के बीच MoU भी हुआ।
नई दिल्ली में बुधवार को बाघ संरक्षण और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘बाघ बहुल क्षेत्र: संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिक पर्यटन के जरिए आजीविका एवं आय सृजन’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यशाला के दौरान भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघों की मौजूदगी वाले क्षेत्र देश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक पूंजी हैं। ये इलाके जल सुरक्षा, कार्बन अवशोषण, जलवायु संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका जैसे कई महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र लाभ प्रदान करते हैं।
बाघ संरक्षण से जुड़ा है पूरा पारिस्थितिकी तंत्र
केंद्रीय मंत्री ने भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत अब तक की संरक्षण यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि बाघों का संरक्षण केवल बाघों तक सीमित विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध जंगलों, घास के मैदानों, नदियों, वन्यजीव गलियारों और इन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों से है।
उन्होंने कहा कि संरक्षण की नीतियों में मानव और प्रकृति के बीच संतुलन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, दीर्घकालिक संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब स्थानीय समुदायों की जरूरतों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए।
जानकारी और क्षमता निर्माण पर जोर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य केवल विचारों का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि अनुभव साझा करने, क्षमता निर्माण और नीतिगत सोच को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम करना है।
कार्यशाला में बाघ बहुल क्षेत्रों में संरक्षण के साथ जैव अर्थव्यवस्था और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है।
IBCA और ADB के बीच हुआ समझौता
दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA), एशियाई विकास बैंक (ADB) और पर्यावरण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। कार्यक्रम 2 और 3 सितंबर 2026 को आयोजित हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान IBCA और ADB ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर अपनी साझेदारी को औपचारिक रूप दिया। इस समझौते के जरिए भूदृश्य संरक्षण, सतत विकास, क्षमता निर्माण और प्रकृति के अनुकूल वित्तीय पहलों में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
यह साझेदारी संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा बाघ बहुल क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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