शिवराज सिंह चौहान ने वाटरशेड परियोजनाओं की समीक्षा की, राज्यों से तेज क्रियान्वयन का आह्वान
WDC-PMKSY 2.0 के तहत 1,220 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से तेज क्रियान्वयन, जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने वाले ठोस परिणाम सुनिश्चित करने को कहा।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (WDC-PMKSY) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राज्यों से परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने और इनके जरिए किसानों को दिखाई देने वाले ठोस लाभ पहुंचाने की अपील की।
चौहान ने कहा कि वाटरशेड विकास का मकसद सिर्फ जल संरचनाएं तैयार करना नहीं है। इसके जरिए खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ाना, भूमि की उत्पादकता सुधारना और किसानों की आय तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने इसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
1,220 परियोजनाओं को मिली मंजूरी
WDC-PMKSY 2.0 के तहत अब तक देश में 1,220 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनका दायरा करीब 52.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक है। परियोजनाओं के लिए कुल 12,404 करोड़ रुपये की मंजूर लागत निर्धारित की गई है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 8,134 करोड़ रुपये है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्रीय हिस्से की 6,955.75 करोड़ रुपये राशि जारी की जा चुकी है।
जल संरक्षण से बढ़ी कृषि क्षमता
मंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता को केवल खर्च की गई राशि से नहीं मापा जाना चाहिए। वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि परियोजनाओं से खेतों में पानी, भूमि की गुणवत्ता, सिंचाई सुविधा और किसानों की आय में कितना सुधार आया।
वाटरशेड गतिविधियों से लगभग 1.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल सघनता बढ़ी है। ऐसे कई इलाकों में, जहां पहले एक फसल लेना भी चुनौतीपूर्ण था, किसान अब दो और कुछ स्थानों पर तीन फसलें तक ले रहे हैं। बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य लाभकारी फसलों को भी बढ़ावा मिला है।
1.24 लाख जल संरचनाएं तैयार
योजना के अंतर्गत करीब 1.24 लाख जल संरक्षण एवं जल संचयन संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन किया गया है। इनमें तालाब, चेक डैम, नाला बंध, परकोलेशन टैंक, मेड़बंदी और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी संरचनाएं शामिल हैं।
इनका उद्देश्य बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोकना और उसका बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे भूजल स्तर को सहारा देने के साथ कृषि गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है।
3.08 लाख हेक्टेयर में मिली सुरक्षात्मक सिंचाई
वाटरशेड कार्यक्रम के तहत करीब 3.08 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में सुरक्षात्मक सिंचाई की सुविधा विकसित हुई है। इससे बारिश पर निर्भर किसानों को कम वर्षा या सूखे जैसी परिस्थितियों में फसल बचाने में सहायता मिल सकती है।
योजना से अब तक लगभग 28.50 लाख किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा करीब 1.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण, बागवानी और पौधरोपण संबंधी गतिविधियां हुई हैं। कार्यक्रम से करीब 2.85 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ है।
खर्च के बजाय परिणाम पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों से तकनीक आधारित, पारदर्शी और प्रदर्शन केंद्रित तरीके से काम करने को कहा। उन्होंने परियोजनाओं को समयसीमा के भीतर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनके अनुसार, किसी परियोजना की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि उस पर कितनी राशि खर्च हुई। इसके बजाय पानी की उपलब्धता, सिंचाई क्षेत्र, भूमि की उत्पादकता, फसल सघनता और किसानों की आजीविका में हुए वास्तविक बदलाव को प्रमुख मानक बनाया जाना चाहिए।
वाटरशेड विकास को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश
मंत्री ने वाटरशेड यात्रा और वाटरशेड महोत्सव जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जल और भूमि संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य वाटरशेड कार्यक्रम को केवल सरकारी योजना तक सीमित रखने के बजाय जल सुरक्षा, कृषि सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि से जुड़े व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाना है।
किसानों तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
समीक्षा के दौरान राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि वाटरशेड परियोजनाओं का लाभ गांवों और किसानों के अंतिम छोर तक पहुंचे तथा उनके सकारात्मक प्रभाव को जमीन पर स्पष्ट रूप से देखा जा सके।
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