India-New Zealand FTA 2026: भारत के निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इसके तहत भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। समझौते से एमएसएमई, किसानों, श्रम-प्रधान उद्योगों, फार्मा और सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है और न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

Oct 20, 2026 - 12:12
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India-New Zealand FTA 2026: भारत के निर्यात को 100% शुल्क-मुक्त पहुंच

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच देने की बात कही गई है। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर खुल सकते हैं। सरकार के अनुसार, डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है।

पीयूष गोयल ने बताया भारतीय कारोबार के लिए अहम कदम

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते के लागू होने को भारत की आर्थिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलने से एमएसएमई, किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ के अवसर मिलेंगे।

गोयल के मुताबिक, समझौता भारतीय पेशेवरों के लिए भी नए रास्ते खोल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मूलभूत हितों को सुरक्षित रखने का ध्यान रखा गया है।

किसानों और कृषि उत्पादों को मिल सकती है नई पहुंच

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं। कृषि क्षेत्र में सहयोग से उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय को मजबूत करने की संभावनाएं भी जताई गई हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सहित संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है। इस प्रावधान का उद्देश्य व्यापार विस्तार के साथ घरेलू हितों का संतुलन बनाए रखना है।

पुणे में बनी जेसीबी मशीन न्यूजीलैंड भेजी गई

पीयूष गोयल ने विजयादशमी के अवसर पर भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी में नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन की न्यूजीलैंड के लिए पहली खेप को हरी झंडी दिखाने का भी उल्लेख किया।

उनके अनुसार, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने में यह समझौता सहायक हो सकता है। न्यूजीलैंड में भारतीय मशीनरी की मांग बढ़ने से विनिर्माताओं और उनसे जुड़े कारोबारों को अवसर मिल सकते हैं।

व्यापार के साथ निवेश और कारोबार सुगमता पर जोर

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते केवल आयात-निर्यात शुल्क घटाने तक सीमित नहीं होते। इनके जरिए व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि ऐसे समझौते नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए कामकाज आसान करने में भी भूमिका निभाते हैं।

20 अरब डॉलर तक के निवेश की संभावना

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड समझौता कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का रास्ता खोल सकता है।

समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार को आने वाले वर्षों में दोगुना करने की भी उम्मीद जताई गई है। हालांकि, वास्तविक परिणाम कारोबारियों की भागीदारी, बाजार की मांग और निवेश संबंधी फैसलों पर निर्भर करेंगे।

सेवा, फार्मा और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को भी अवसर

एफटीए से सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं, निर्माण, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेवाओं में काम करने वाली भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर मिलने की संभावना है।

फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के लिए भी नियामकीय प्रक्रियाओं में सहूलियत अहम हो सकती है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, न्यूजीलैंड वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों की निरीक्षण मंजूरियों को स्वीकार करेगा, जिससे कुछ मामलों में अनुपालन का बोझ घट सकता है और बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है।

समझौते से क्या बदल सकता है?

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश के अवसर बढ़ाना और दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को मजबूत करना है। भारतीय निर्यातकों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच, कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार और सेवा क्षेत्र में संभावित विस्तार इसके प्रमुख पहलू हैं।

प्रकाशन से पहले सत्यापन: समझौते के लागू होने की तारीख, 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, 20 अरब डॉलर के निवेश संबंधी प्रावधान और जेसीबी मशीन की पहली खेप से जुड़ी जानकारी की वाणिज्य मंत्रालय या आधिकारिक सरकारी घोषणा से पुष्टि कर लें।

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