भारत यूरोप को हथियार निर्यात में तीसरे स्थान पर, रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर

भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत पिछले एक साल में यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना है। सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन और यूरोपीय देशों के साथ संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

Oct 24, 2026 - 09:24
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भारत यूरोप को हथियार निर्यात में तीसरे स्थान पर, रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर

भारत के रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग का लाभ मिल रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, यूरोप की ‘रीआर्म यूरोप’ पहल के तहत रक्षा सामग्री की मांग बढ़ने से भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत को पिछले एक साल में यूरोप का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बताया।

38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा निर्यात

रक्षा सचिव ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारत का रक्षा निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंचकर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में मानक गोला-बारूद, तोप के गोले और अलग-अलग कैलिबर के गोला-बारूद की मांग बढ़ने से भारतीय निर्यात को गति मिली है।

सिंह के मुताबिक, यूरोप में रक्षा खरीद बढ़ने के साथ भारत के विस्तारित विनिर्माण क्षेत्र को भी नए अवसर मिल रहे हैं।

रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ा निजी कंपनियों का योगदान

रक्षा सचिव ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र का काफी विस्तार हुआ है। इस क्षेत्र में 16 बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अलावा लगभग 840 बड़ी और मध्यम आकार की निजी कंपनियां काम कर रही हैं। इनके साथ करीब 17,000 छोटे उद्यम और स्टार्टअप भी रक्षा उत्पादन से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि इस व्यापक औद्योगिक आधार का असर घरेलू बिक्री में दिखाई दे रहा है, जिसका मूल्य लगभग 17 अरब यूरो तक पहुंच गया है। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री का निर्यात करता है।

स्वदेशी रक्षा उत्पादों को प्राथमिकता

राजेश कुमार सिंह के अनुसार, सरकार का लक्ष्य हर साल होने वाले लगभग 20 से 25 अरब डॉलर के रक्षा पूंजीगत व्यय का 75 प्रतिशत हिस्सा देश के भीतर खर्च करना है। इसके लिए भारतीय डिजाइन, विकास और विनिर्माण वाले उत्पादों यानी आईडीडीएम (IDDM) को प्राथमिकता दी जा रही है।

भारत का रक्षा निर्यात केवल तोपों और गोला-बारूद तक सीमित नहीं है। इसमें छोटे हथियारों के साथ हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य सामरिक उपकरण भी शामिल हैं।

दक्षिण-पूर्व एशिया में भी रक्षा सौदों की संभावनाएं

रक्षा सचिव ने बताया कि दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई क्षेत्रों में भारतीय रक्षा उत्पादों की खरीद को लेकर बातचीत चल रही है। इन प्रस्तावों में रक्षा उपकरणों, छोटे हथियारों और तोप प्रणालियों की आपूर्ति शामिल है।

उन्होंने कहा कि भारत अपने रक्षा निर्यात के अवसर बढ़ाने के साथ उत्पादन क्षमता को भी अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप विकसित करना चाहता है।

रूस पर निर्भरता कम, रक्षा साझेदारियों में विविधता

सिंह ने कहा कि भारत पहले रक्षा उपकरणों के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर था, लेकिन समय के साथ आयात के स्रोतों में विविधता आई है। भारत के पास अब भी रूसी मूल के कई रक्षा उपकरण हैं, वहीं फ्रांस, इजरायल और अन्य देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत हुए हैं।

रक्षा सचिव के मुताबिक, रूस के बाद भारत के रक्षा आयात में फ्रांस और इजरायल की हिस्सेदारी लगभग 15-15 प्रतिशत है। उन्होंने ग्रीस और साइप्रस के साथ भी रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया।

यूरोप में संयुक्त उद्यम स्थापित करने की योजना

भारत यूरोप के रक्षा खरीद कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए वहां संयुक्त उद्यम स्थापित करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इसके साथ ही यूरोपीय कंपनियों को भारतीय रक्षा बाजार में अवसर हासिल करने के लिए भारत में संयुक्त उद्यम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत के रक्षा खरीद कार्यक्रमों में भाग लेने वाली यूरोपीय कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और यूरोप के बीच प्रस्तावित साझेदारी समझौता रक्षा विनिर्माताओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक एकीकृत करने में मदद करेगा। इससे दोनों पक्षों के बीच रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को विस्तार मिल सकता है।

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