अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, डेमोक्रेट्स को बढ़त

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को बढ़त के संकेत मिले हैं। महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और ट्रंप प्रशासन की नीतियां चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे हैं। प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत का फैसला अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेगा।

Oct 27, 2026 - 11:03
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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026: ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट, डेमोक्रेट्स को बढ़त

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले जारी जनमत सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौती के संकेत मिल रहे हैं। मतदान से पहले के सर्वेक्षणों में कांग्रेस के लिए डेमोक्रेट्स को बढ़त दिखाई गई है। महंगाई, ईंधन की कीमतों और ईरान के साथ संघर्ष को लेकर मतदाताओं की चिंताएं चुनावी चर्चा के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

रॉयटर्स-इप्सोस के 26 अक्टूबर को प्रकाशित सर्वेक्षण के मुताबिक, कांग्रेस के चुनाव में डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन पार्टी पर बढ़त मिली। सर्वे में ट्रंप की कार्यशैली को लेकर भी असंतोष सामने आया। हालांकि, जनमत सर्वेक्षण अंतिम चुनाव परिणाम की गारंटी नहीं होते और वास्तविक नतीजे उम्मीदवारों तथा अलग-अलग राज्यों में मुकाबले पर निर्भर करेंगे।

प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण को लेकर मुकाबला

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—में बहुमत का सवाल ट्रंप के शेष कार्यकाल के लिए महत्वपूर्ण है। यदि डेमोक्रेट्स किसी सदन में बहुमत हासिल करते हैं, तो वे प्रशासन की नीतियों, विधायी प्रस्तावों और सरकारी कामकाज की निगरानी में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

ऐसी स्थिति में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ने की संभावना भी रहेगी। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के बहुमत के बीच उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही हुई थी। मौजूदा चुनाव में सदनों का नियंत्रण किस पार्टी के पास रहेगा, यह आगे की राजनीतिक दिशा तय करने वाले प्रमुख सवालों में शामिल है।

अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतें बनीं चुनावी मुद्दे

मतदाताओं की आर्थिक चिंताएं चुनावी माहौल में अहम भूमिका निभा रही हैं। महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और आयात शुल्क से जुड़ी नीतियां अमेरिकी परिवारों तथा कारोबारों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस के केंद्र में हैं।

रॉयटर्स-इप्सोस के हालिया सर्वेक्षण में भी जीवन-यापन की लागत को लेकर व्यापक चिंता सामने आई। सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि देश में रहने का खर्च गलत दिशा में जा रहा है। ईरान के साथ संघर्ष के बाद ऊर्जा की कीमतों को लेकर चिंताओं ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता दी है।

ट्रंप ने 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान ईंधन की कीमतें कम करने का वादा किया था। अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर असंतोष उनके प्रशासन के आर्थिक रिकॉर्ड पर बहस का हिस्सा बन गया है। हालांकि, ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, आपूर्ति, करों और क्षेत्रीय परिस्थितियों सहित कई कारकों से प्रभावित होती हैं।

ट्रंप ने चुनाव को अपने प्रशासन पर जनमत संग्रह बताया

ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों को अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दौर के कामकाज पर जनता की राय से जोड़कर पेश किया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से चुनावी रैलियां भी की हैं।

दूसरी ओर, कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने स्थानीय मतदाताओं के हितों को प्राथमिकता देने और राष्ट्रपति की नीतियों से असहमति होने पर उनका विरोध करने की बात कही है। इससे संकेत मिलता है कि चुनाव प्रचार में पार्टी के प्रति समर्थन के साथ-साथ उम्मीदवारों की अपनी राजनीतिक पहचान भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को बढ़त, लेकिन नतीजे तय नहीं

अक्टूबर में प्रकाशित कई राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में कांग्रेस के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को रिपब्लिकन उम्मीदवारों से आगे दिखाया गया। रियल क्लियर पॉलिटिक्स के राष्ट्रीय मतदान रुझान में भी डेमोक्रेट्स की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मिलने वाला समर्थन सीधे तौर पर प्रतिनिधि सभा की सीटों में तब्दील नहीं होता, क्योंकि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला अलग होता है।

कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट जैसे चुनाव विश्लेषक संस्थान अलग-अलग सीटों के मुकाबले का आकलन करते हैं। अनिश्चित मानी जाने वाली सीटों पर उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे और मतदान प्रतिशत नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए सीटों के अनुमानों को संभावित परिदृश्य के तौर पर देखना चाहिए, न कि निश्चित परिणाम के रूप में।

सीनेट में अलग हो सकता है मुकाबले का समीकरण

प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर हर दो साल में चुनाव होते हैं, जबकि सीनेट में छह साल के कार्यकाल के कारण हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर मतदान होता है। इस बार सीनेट की जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनके नतीजे भी कांग्रेस में शक्ति संतुलन तय करने में अहम होंगे।

राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से प्रतिनिधि सभा के मुकाबले की दिशा का अंदाजा मिलता है, लेकिन सीनेट का नियंत्रण कई राज्यों में होने वाले अलग-अलग मुकाबलों पर निर्भर करता है। इसलिए दोनों सदनों के नतीजों का आकलन अलग-अलग करना जरूरी है।

मतदान और अंतिम नतीजों पर रहेगी नजर

मध्यावधि चुनावों में मतदान प्रतिशत राष्ट्रपति चुनावों की तुलना में अक्सर कम रहता है। शुरुआती मतदान और डाक मतपत्रों के जरिए वोट डालने वाले नागरिकों की संख्या चुनावी भागीदारी का संकेत देती है, लेकिन इससे अपने आप किसी पार्टी की जीत तय नहीं होती।

अंतिम परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट में किस पार्टी को कितना समर्थन मिला। चुनाव का असर न केवल ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर पड़ेगा, बल्कि अगले दो वर्षों में कानून बनाने, सरकारी खर्च और प्रशासनिक फैसलों पर निगरानी की दिशा भी इससे प्रभावित होगी।

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