India Transport Network: पुल, सुरंग और एक्सप्रेसवे बदल रहे सफर का तरीका, हाई-स्पीड रेल से नई रफ्तार
भारत में पुलों, सुरंगों, एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेल परियोजनाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी में बदलाव आ रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाएं यात्रा के समय को कम करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
भारत में परिवहन और कनेक्टिविटी का ढांचा तेजी से आधुनिक हो रहा है। पुलों, सुरंगों, एक्सप्रेसवे और नई पीढ़ी की रेल सेवाओं ने कई महत्वपूर्ण मार्गों पर यात्रा के समय को काफी कम किया है। गुरुवार को जारी एक सरकारी फैक्टशीट में देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार किए गए ऐसे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स का उल्लेख किया गया।
पुलों से नदी पार करना हुआ आसान
ब्रह्मपुत्र नदी पर बने रेल-सह-सड़क पुल ने धीमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच आवागमन को काफी आसान किया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, जिस सफर में पहले लगभग पूरा दिन लग जाता था, वह अब करीब एक से दो घंटे में पूरा किया जा सकता है।
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के जरिए मुंबई और नवी मुंबई के बीच सीधा संपर्क मजबूत हुआ है और यात्रा का समय करीब 20 मिनट तक रह गया है। वहीं, कोसी रेल महासेतु ने निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल यात्रा का समय करीब आठ घंटे से घटाकर लगभग 30 मिनट कर दिया है।
अरुणाचल प्रदेश में सिसेरी नदी पर बने करीब 200 मीटर लंबे पुल से पासीघाट और रोइंग के बीच यात्रा में लगभग पांच घंटे की बचत होने का दावा किया गया है। इससे दिबांग घाटी और सियांग क्षेत्र के बीच संपर्क भी बेहतर हुआ है।
सुरंगों ने कठिन इलाकों में खोले नए रास्ते
पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में सुरंगें कम दूरी और हर मौसम में संपर्क उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग रोहतांग दर्रे को बायपास करती है और मनाली-सर्चू मार्ग की दूरी करीब 46 किलोमीटर कम करती है। इससे लाहौल-स्पीति क्षेत्र को सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
जम्मू-कश्मीर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग कठिन पहाड़ी क्षेत्र को पार करने का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है। इससे यात्रा की दूरी करीब 30 किलोमीटर कम होने और जम्मू-श्रीनगर सफर में लगभग दो घंटे की बचत होने की जानकारी दी गई है।
अरुणाचल प्रदेश में करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी सेला सुरंग तेजपुर-तवांग मार्ग पर हर मौसम में आवाजाही बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है। यह मार्ग रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
एक्सप्रेसवे से लंबी दूरी का सफर तेज
देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार से प्रमुख शहरों के बीच सड़क यात्रा का समय भी कम हो रहा है। 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के कारण दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा का समय करीब ढाई घंटे से घटकर लगभग 50 मिनट रह गया है।
213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटकर करीब ढाई घंटे होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली-मुंबई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि दोनों महानगरों के बीच सफर का समय करीब 33 घंटे से घटकर लगभग 12 घंटे तक आ सके।
हाई-स्पीड रेल से बदल रही यात्रा की तस्वीर
रेल क्षेत्र में भी तेज गति वाली सेवाओं पर जोर दिया जा रहा है। वंदे भारत एक्सप्रेस और भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए यात्रा समय कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। यह 12 स्टेशनों को जोड़ेगा। परियोजना में ठाणे क्रीक के नीचे करीब सात किलोमीटर लंबी भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग भी शामिल है। इसकी पहली सेवा अगस्त 2027 में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, केंद्रीय बजट 2026-27 में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इनकी कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर होगी और इनके लिए लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
कुल मिलाकर, पुल, सुरंग, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाएं देश में यात्रा की दूरी के साथ-साथ समय को भी कम करने पर केंद्रित हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी के साथ आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना है।
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