इंडिया-UN फंड की सराहना, 64 देशों में 94 विकास परियोजनाओं को समर्थन
संयुक्त राष्ट्र में इंडिया-UN फंड के वार्षिक आयोजन 2026 में भारत के विकास सहयोग की सराहना की गई। सांसद संगीता कुमारी सिंह देव और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने ग्लोबल साउथ के साथ साझेदारी, 64 देशों में 94 परियोजनाओं तथा स्वास्थ्य, ऊर्जा, सिंचाई और जलवायु अनुकूलन से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया।
भारत के लिए विकास सहयोग उसकी विदेश नीति का एक अहम स्तंभ है। भाजपा सांसद संगीता कुमारी सिंह देव ने संयुक्त राष्ट्र में इंडिया-UN फंड के वार्षिक आयोजन 2026 को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह फंड ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की व्यापक साझेदारी को मजबूत करता है और विकास से जुड़ी स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
इस कार्यक्रम में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, प्रशांत क्षेत्र और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधियों ने भारत के विकास सहयोग की सराहना की। फंड के माध्यम से रियायती वित्त, बुनियादी ढांचे, मानवीय सहायता, क्षमता निर्माण, डिजिटल सहयोग और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को समर्थन दिया जाता है।
2017 में शुरू हुआ था इंडिया-UN डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड
संगीता कुमारी सिंह देव ने बताया कि 2017 में 150 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता के साथ शुरू किया गया यह फंड दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों के बीच अनुभव और संसाधनों को साझा करना तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में प्रगति को गति देना है।
उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी मांग-आधारित है। इसमें सहयोग प्राप्त करने वाले देश अपनी प्राथमिकताएं तय करते हैं और भारत उनके साथ मिलकर उन जरूरतों को ठोस परिणामों में बदलने का प्रयास करता है।
संगीता सिंह देव के अनुसार, भारत का यह दृष्टिकोण आपसी सम्मान, साझा लाभ और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों पर आधारित है।
64 देशों में 94 परियोजनाओं को मिला समर्थन
संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल हाओ लियांग जू ने बताया कि इंडिया-UN डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड ने 64 देशों में 94 परियोजनाओं को समर्थन दिया है। उनके अनुसार, यह पहल भारत के वित्तीय संसाधनों और विकास संबंधी अनुभव को साझेदार देशों की जरूरतों से जोड़ती है।
उन्होंने बुर्किना फासो की हालिया यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत के सहयोग से बांध निर्माण, सिंचाई, महिला सहकारी समितियों, सामुदायिक मत्स्य पालन और स्कूलों में सुधार जैसे कार्य किए गए। उनके मुताबिक, इन परियोजनाओं से 50,000 से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि भारत का विकास सहयोग ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के बीच अनुभव साझा करने और क्षमताओं को मजबूत करने से अधिक टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलता है।
तुवालु से क्यूबा तक भारत के सहयोग की सराहना
कार्यक्रम में कई देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के सहयोग से संचालित परियोजनाओं के अनुभव साझा किए।
तुवालु के स्थायी प्रतिनिधि तपुगाओ फलेफौ ने इंडिया-UN फंड को अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग का व्यावहारिक उदाहरण बताया। उन्होंने अपने देश के फुनाओटा समुदाय में सौर ऊर्जा आधारित घरेलू प्रणालियां स्थापित करने की परियोजना का उल्लेख किया, जिससे विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
श्रीलंका के स्थायी प्रतिनिधि जयंता जयसूर्या ने विकास वित्तपोषण की चुनौतियों के बीच ग्लोबल साउथ के नेतृत्व वाली सहायता पहलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से दिए गए एक अरब डॉलर के क्रेडिट और चक्रवात के बाद ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत मिली राहत का जिक्र किया।
मोल्दोवा के प्रतिनिधि घोरघे लेउका ने कहा कि भारत के सहयोग से उनके देश के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो को आबादी और प्रवासन से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े तैयार करने में मदद मिली। वहीं, तंजानिया के प्रतिनिधि तोगोलानी एड्रिस मावोरा ने जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए फंड की परियोजनाओं को महत्वपूर्ण बताया।
स्वास्थ्य और मातृ-शिशु देखभाल में भी सहयोग
क्यूबा के स्थायी प्रतिनिधि अर्नेस्टो सोबेरॉन गुज़मैन ने ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका और सहयोग की सराहना की। उन्होंने मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने और बीमारियों से निपटने के लिए मिले समर्थन का उल्लेख किया।
पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के निदेशक जारबाज़ बारबोसा ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभाव पर बात करते हुए पैराग्वे के निवाक्ले समुदाय की एक मां लेटिसिया के अनुभव का जिक्र किया। उनके अनुसार, इस सहयोग ने स्थानीय संस्कृति और मातृत्व से जुड़े अनुभवों को समझने का प्रयास किया।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग से स्थानीय जरूरतों को मिल रहा समर्थन
इंडिया-UN फंड के वार्षिक आयोजन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने आपदा राहत, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन, सांख्यिकी व्यवस्था, ऊर्जा और मातृ स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भारत के सहयोग की चर्चा की।
कार्यक्रम में सामने आए अनुभवों के अनुसार, इस तरह की साझेदारी का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करना और देशों की अपनी क्षमताओं को मजबूत करना भी है। भारत ने इस पहल के माध्यम से ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग और साझा विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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