इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का भीषण भूकंप, 51 लोगों की मौत; 14 दिन का आपातकाल घोषित
इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप और आसपास के इलाकों में 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है। हादसे में कम से कम 51 लोगों की मौत की रिपोर्ट है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत में 15 से 28 अगस्त तक 14 दिन की आपातकालीन प्रतिक्रिया अवधि घोषित की गई है।
फ्लोरेस द्वीप में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में 14 दिनों की आपातकालीन प्रतिक्रिया लागू की गई है। यह व्यवस्था 15 अगस्त से 28 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।
शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद रविवार तक चार और शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 51 हो गई। इस प्राकृतिक आपदा से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:58 बजे फ्लोरेस क्षेत्र में आया। इसका केंद्र जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे था। तेज झटकों के बाद संभावित सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की गई थी, जिसके चलते लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, बाद में सुनामी की चेतावनी वापस ले ली गई।
इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद 235 से ज्यादा आफ्टरशॉक दर्ज किए गए। लगातार झटकों और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
रविवार को बचाव दल फ्लोरेस के छह क्षेत्रों में मलबे के बीच लोगों की तलाश में जुटे रहे। मंगराई, पूर्वी मंगराई और नागेकेओ को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल बताया गया है। इन क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण कुछ स्थानों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
अधिकारियों के मुताबिक, कई जगहों पर मलबा हटाकर गांवों तक जाने वाली सड़कें दोबारा खोल दी गई हैं। हालांकि, संचार सेवाओं में रुकावट और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से बचाव अभियान में मुश्किलें बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, हादसे में 101 लोग घायल हुए हैं। करीब 900 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि लगभग 450 घरों को नुकसान पहुंचा है। भूकंप के बाद करीब 5,000 लोगों को अस्थायी आश्रय स्थलों में रहना पड़ रहा है।
प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, फंसे लोगों को निकालने और विस्थापित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
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