Iran-US Tension: ईरान का 7 दिन का प्लान, होर्मुज और परमाणु वार्ता पर बड़ा प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिवसीय योजना रखी है, जिसमें छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और सातवें दिन परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव है। अमेरिका ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिवसीय प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को छठे दिन दोबारा खोलने और सातवें दिन परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि प्रस्ताव के तहत अमेरिका को पहले कुछ कदम उठाने होंगे।
ईरान ने रखीं कई शर्तें
अराघची के अनुसार, तेहरान चाहता है कि अमेरिका सैन्य दबाव और नाकेबंदी समाप्त करे, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करे और उसे तेल बेचने की अनुमति दे। ईरान का कहना है कि इन शुरुआती कदमों को कुछ दिनों में पूरा किया जा सकता है।
इसके बाद प्रस्ताव के छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सातवें दिन व्यापक समझौते के लिए अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने की योजना है।
ट्रंप ने प्रस्ताव को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिवसीय प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही है। अमेरिकी पक्ष का मुख्य आपत्ति प्रस्ताव के क्रम को लेकर है—वॉशिंगटन के अनुसार ईरान बातचीत शुरू होने से पहले ही कई बड़ी रियायतें चाहता है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने भी कहा कि ईरान की मांगों में प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना शामिल है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन मांगों को पहले स्वीकार करना उसके लिए संभव नहीं है।
ईरान ने कूटनीति का रास्ता खुला रखा
अमेरिका की सार्वजनिक असहमति के बावजूद अराघची ने कहा कि ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है और मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। तेहरान ने संकेत दिया है कि बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ मुद्दों पर सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को लेकर बातचीत की संभावना का संकेत दिया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच संघर्ष, प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद अभी बने हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास बढ़ा तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर डाल सकता है। ईरान का प्रस्ताव इसी रणनीतिक जलमार्ग को लेकर चल रहे गतिरोध को कूटनीतिक प्रक्रिया से जोड़ता है।
फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। ईरान अपनी शर्तों के साथ बातचीत के लिए तैयार होने की बात कह रहा है, जबकि अमेरिका प्रस्ताव में मांगी गई शुरुआती रियायतों पर सहमत नहीं है।
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