India-US Relations: जयशंकर ने रुबियो से रूस प्रतिबंध कानून पर जताई चिंता, 100% टैरिफ का मुद्दा अहम
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के दौरान नए Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं पर चर्चा की। कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है।
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारत और अमेरिका के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर नए अमेरिकी प्रतिबंध कानून के संभावित असर पर चर्चा हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ मुलाकात के दौरान Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को सामने रखा। दोनों नेताओं की यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान हुई।
जयशंकर ने बैठक के बाद बताया कि उन्होंने SRIA से जुड़े भारत के हितों और चिंताओं को रुबियो के सामने रखा। बातचीत में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ।
ऊर्जा सुरक्षा पर अमेरिका का रुख
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, बैठक में रूस और ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों के अलावा क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों को ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने की स्थिति में है।
यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब भारत रूस से होने वाली ऊर्जा खरीद पर अमेरिकी कानून के संभावित प्रभावों का आकलन कर रहा है।
क्या भारत पर लगेगा 100 प्रतिशत शुल्क?
नए अमेरिकी कानून में राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। संभावित शुल्क की सीमा 100 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। किसी देश के खिलाफ इस अधिकार का इस्तेमाल करने का निर्णय अमेरिकी प्रशासन को लेना होगा।
रुबियो ने यह भी कहा कि कानून में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति को छूट देने का प्रावधान मौजूद है। इसका इस्तेमाल किस स्थिति में किया जाएगा, इसका फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे।
रूस से तेल खरीद भारत के लिए अहम
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीद करता रहा है। रूस भी भारतीय ऊर्जा आयात का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। ऐसे में रूस से तेल खरीद पर संभावित अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क भारत के लिए आर्थिक और ऊर्जा नीति से जुड़ा मुद्दा है।
भारत का विदेश मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि देश अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए भारत विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर फैसले लेने की नीति पर कायम है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी नजर
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावना का असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है और ऐसे में संभावित अमेरिकी शुल्क का मुद्दा वार्ता में महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। मौजूदा कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है, लेकिन इसका वास्तविक इस्तेमाल प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।
खाड़ी और यूक्रेन पर भी हुई चर्चा
जयशंकर और रुबियो की बातचीत केवल रूस-ईरान प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन से जुड़े घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। रुबियो ने बैठक के बाद भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर समन्वय जारी रखने की बात कही।
भारत के लिए इस पूरे मामले में ऊर्जा की उपलब्धता, कीमत और आपूर्ति के विविध स्रोत प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। वहीं अमेरिका की ओर से नए कानून के तहत संभावित कदमों पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में है।
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