लद्दाख में ‘गोबा’ का मानदेय बढ़ा, अब हर महीने मिलेंगे 5 हजार रुपये; 247 ग्राम प्रधानों को लाभ
लद्दाख में स्थानीय रूप से गोबा और नंबरदार कहे जाने वाले ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय ₹1,500 से बढ़ाकर ₹5,000 कर दिया गया है। इस फैसले से 247 नंबरदारों को लाभ मिलेगा। संशोधित मानदेय आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तारीख से लागू होगा।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्थानीय स्तर पर ‘गोबा’ और ‘नंबरदार’ के नाम से पहचाने जाने वाले ग्राम प्रधानों के मासिक मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मानदेय को ₹1,500 से बढ़ाकर ₹5,000 प्रति माह करने को मंजूरी दी है। इस फैसले से पूरे लद्दाख में 247 नंबरदारों को लाभ मिलेगा।
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, यह बढ़ोतरी 233 प्रतिशत से अधिक है और पिछले 10 वर्षों में पहली बार नंबरदारों के मानदेय में संशोधन किया गया है। संशोधित राशि से ग्राम स्तर पर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वय करने वाले इन प्रतिनिधियों को पहले की तुलना में अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी।
लंबे समय से की जा रही थी मानदेय बढ़ाने की मांग
लद्दाख प्रशासन के मुताबिक, नंबरदार लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अलग-अलग गांवों के दौरे के दौरान उपराज्यपाल को इस संबंध में कई ज्ञापन मिले थे।
19 सितंबर 2026 को विभिन्न गांवों के नंबरदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी उपराज्यपाल से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जिम्मेदारियों और मौजूदा मानदेय को देखते हुए राशि बढ़ाने की मांग रखी थी। इसके बाद उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को मामले की समीक्षा करने और उचित समाधान निकालने का निर्देश दिया।
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कड़ी का काम करते हैं गोबा
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, नंबरदार यानी गोबा जमीनी स्तर पर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। खासकर दूरदराज और भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में उनका स्थानीय संपर्क उपयोगी माना जाता है।
गोबा गांव की स्थानीय जरूरतों और समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाते हैं।
पानी की समस्याओं के समाधान में भी निभाई भूमिका
उपराज्यपाल ने गांवों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को प्रशासन के सामने लाने में नंबरदारों की सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया। प्रशासन के मुताबिक, हाल के समय में गांवों में पानी से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान के लिए उठाए गए कदमों में नंबरदारों से मिली स्थानीय जानकारी उपयोगी रही।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर की समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए प्रशासन तथा समुदाय के बीच संवाद की भूमिका भी सामने आती है।
राजपत्र में अधिसूचना के बाद लागू होगा नया मानदेय
लद्दाख प्रशासन ने बताया कि संशोधित मानदेय आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगा। नया मानदेय जम्मू-कश्मीर लंबरदारी अधिनियम, 1972 और जम्मू-कश्मीर लंबरदारी नियम, 1980 के उन प्रावधानों के तहत तय किया गया है, जो केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लागू हैं।
उपराज्यपाल के मुताबिक, मानदेय में यह बढ़ोतरी नंबरदारों की जिम्मेदारियों और लंबे समय से चली आ रही मांग को मान्यता देने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सहभागी शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक कदम है।
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