रूसी तेल पर अमेरिकी कानून का अध्ययन करेगा भारत, पीयूष गोयल बोले- उचित समय पर होगी चर्चा
रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ के नए कानून को लेकर भारत ने कहा है कि वह पहले इसके प्रावधानों का अध्ययन करेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस मुद्दे पर उचित समय पर चर्चा की जाएगी।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ से जुड़े नए कानून के प्रावधानों का पहले अध्ययन करेगा। इसके बाद इस मुद्दे पर “उचित समय पर” चर्चा की जाएगी।
गोयल का यह बयान अमेरिका के नए ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को लेकर आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कानून पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद अमेरिकी प्रशासन को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति मिली है। कानून के तहत यह टैरिफ अधिकतम 100 प्रतिशत तक हो सकता है।
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कानून के बारे में पूछे जाने पर पीयूष गोयल ने कहा कि इसके विवरण अभी सामने आ रहे हैं और भारत पहले उनका अध्ययन करेगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर उचित समय पर चर्चा की जाएगी।
इस बयान से यह स्पष्ट है कि भारत फिलहाल कानून के संभावित प्रभाव और इसके लागू होने की प्रक्रिया का आकलन कर रहा है। 100 प्रतिशत टैरिफ को लेकर भी यह समझना जरूरी है कि यह अधिकतम संभावित दर है, कोई ऐसा शुल्क नहीं है जो कानून लागू होते ही सभी संबंधित देशों पर अपने आप लग गया हो।
भारत और चीन पर क्यों है नजर?
अमेरिकी कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय और उससे जुड़े व्यापारिक संबंधों पर दबाव बढ़ाना है। भारत और चीन रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने सितंबर में इस विधेयक को पारित किया था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया।
यदि अमेरिकी प्रशासन भारत पर इस कानून के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत से अमेरिका जाने वाले उन उत्पादों पर पड़ सकता है जिन्हें ऐसे शुल्क के दायरे में रखा जाए। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन कानून के तहत कौन से कदम उठाता है।
कानून में 100% तक टैरिफ का प्रावधान
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह दर 100 प्रतिशत तक हो सकती है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में इसे भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिलहाल कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार देता है।
ईरान और रूसी संस्थाओं पर भी प्रावधान
यह कानून केवल रूसी ऊर्जा कारोबार तक सीमित नहीं है। इसमें ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों से जुड़े प्रतिबंधों के प्रावधान भी शामिल हैं। इसके अलावा रूसी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, बैंकों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े टैंकरों को निशाना बनाने के प्रावधान भी हैं।
कानून का नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम का जुलाई 2026 में निधन हुआ था और वह रूस तथा यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी नीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच नया मुद्दा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। ऐसे में रूसी तेल से जुड़े अमेरिकी कानून का संभावित असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और वार्ता के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भारत ने इससे पहले कहा है कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों तथा ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत फिलहाल नए कानून के विवरण का अध्ययन करेगा। इसके बाद कानून के संभावित प्रभाव और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी।
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