‘मानस’ और ‘महाभारत’ ने जोड़े भारत-किर्गिस्तान के सांस्कृतिक तार, शिक्षाविद ने साझा मूल्यों पर दिया जोर

पीएम मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के बीच ‘मानस’ और ‘महाभारत’ के साझा मूल्यों को लेकर चर्चा हुई। किर्गिज़ शिक्षाविद ने दोनों महाकाव्यों को सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

Aug 31, 2026 - 14:00
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‘मानस’ और ‘महाभारत’ ने जोड़े भारत-किर्गिस्तान के सांस्कृतिक तार, शिक्षाविद ने साझा मूल्यों पर दिया जोर
‘मानस’ और ‘महाभारत’ ने जोड़े भारत-किर्गिस्तान के सांस्कृतिक तार, शिक्षाविद ने साझा मूल्यों पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के बीच भारत और किर्गिस्तान के पुराने सांस्कृतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हुई। किर्गिज़ शिक्षाविद गुलज़ात मायाचिनोवा ने दोनों देशों के प्रसिद्ध महाकाव्यों ‘मानस’ और ‘महाभारत’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें कई ऐसे मूल्य मौजूद हैं, जो दोनों समाजों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं।

सभ्यतागत संवाद को बताया अहम

नेशनल एकेडमी ऑफ ‘मानस’ के इंटरनेशनल रिलेशंस एंड कोऑपरेशन डिपार्टमेंट से जुड़ी मायाचिनोवा ने कहा कि ‘मानस और महाभारत’ सभ्यतागत संवाद की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यापक सभ्यतागत संवाद के विचार से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों के बीच बातचीत से लोगों में आपसी समझ बढ़ती है और पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

उनके मुताबिक, ‘मानस’ किर्गिज़ समाज की पहचान और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी तरह ‘महाभारत’ भारतीय सभ्यता और परंपरा में विशेष स्थान रखता है। दोनों महाकाव्यों में मित्रता, सहयोग, सहनशीलता, साहस और मानवीय मूल्यों जैसे कई समान पहलू दिखाई देते हैं।

साझा मूल्यों से मजबूत हो सकते हैं संबंध

मायाचिनोवा ने कहा कि दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा मूल्यों पर संवाद बढ़ाने से भारत और किर्गिस्तान के बीच लोगों के स्तर पर संबंध और मजबूत हो सकते हैं। उनका मानना है कि ऐसी पहल दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर सामने लाने में भी मददगार हो सकती है।

पूर्व राजदूत ने मोदी की यात्रा को बताया महत्वपूर्ण

भारत में किर्गिस्तान के पूर्व राजदूत इब्राइमोव ओस्मोन ने भी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत और किर्गिस्तान के बीच मजबूत ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण रिश्तों का उल्लेख किया।

ओस्मोन ने भारतीय सभ्यता की प्राचीनता का जिक्र करते हुए ‘महाभारत’ की तुलना दुनिया की अन्य प्रसिद्ध प्राचीन महाकाव्य परंपराओं से की। उन्होंने ‘मानस’ को भी किर्गिज़ सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान बताया।

किर्गिस्तान में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्र

पूर्व राजदूत ने दोनों देशों के बीच शिक्षा सहयोग को भी अहम बताया। उनके अनुसार, करीब 10 हजार भारतीय विद्यार्थी किर्गिस्तान में अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने किर्गिज़ छात्रों को भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के लिए आने को प्रोत्साहित करने की बात कही।

उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने तथा वैज्ञानिक आदान-प्रदान को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के अधिक उपयोग की आवश्यकता बताई।

बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी करने के बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे। वह किर्गिज़ राष्ट्रपति सादिर जापारोव के निमंत्रण पर 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

बिश्केक पहुंचने पर किर्गिज़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।

द्विपक्षीय बैठकों पर भी रहेगी नजर

SCO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार और पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन से इतर कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं।

भारत और किर्गिस्तान के बीच संस्कृति, शिक्षा, विज्ञान, व्यापार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री की यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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