Mohan Bhagwat Dussehra Speech: सत्ता परिवर्तन, OTT और AI पर क्या बोले RSS प्रमुख?

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलनों का लक्ष्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने OTT सामग्री, AI से बने फर्जी वीडियो, नशे की समस्या, युवाओं की भूमिका और भारत में भावनात्मक एकता पर भी अपने विचार रखे।

Oct 20, 2026 - 13:21
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Mohan Bhagwat Dussehra Speech: सत्ता परिवर्तन, OTT और AI पर क्या बोले RSS प्रमुख?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, लोकतांत्रिक आंदोलनों, तकनीक, युवाओं और भारत के विकास मॉडल से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल सत्ता बदलने से किसी समाज की बुनियादी समस्याएं दूर नहीं होतीं। उनके अनुसार, आंदोलनों का लक्ष्य समाधान तलाशना होना चाहिए, न कि समाज में मतभेद और विभाजन को बढ़ावा देना।

सत्ता परिवर्तन के बजाय समाधान पर जोर

भागवत ने बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हुई हालिया घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन को समस्याओं के समाधान के रूप में पेश करना हमेशा कारगर नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि कुछ ताकतें अपने हितों के लिए राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव का इस्तेमाल करती हैं।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका उद्देश्य जनहित से जुड़े सवालों का समाधान निकालना होना चाहिए। भागवत ने राजनीतिक दलों, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन से अपील की कि वे अपने व्यवहार और फैसलों से समाज में कड़वाहट पैदा करने से बचें। उन्होंने संवैधानिक मर्यादाओं, सभ्य संवाद और शालीन आचरण के महत्व पर भी जोर दिया।

OTT सामग्री और युवाओं की जिम्मेदारी पर चर्चा

RSS प्रमुख ने डिजिटल मंचों पर उपलब्ध सामग्री को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल विवेक और समझदारी के साथ करना चाहिए। उनके मुताबिक, समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए OTT प्लेटफॉर्म के लिए उचित नियमों पर विचार किया जाना चाहिए।

भागवत ने यह भी कहा कि केवल भौतिक सुविधाओं में वृद्धि को विकास का पैमाना नहीं माना जा सकता। विज्ञान और तकनीक जीवन को बेहतर बनाने तथा तार्किक सोच को प्रोत्साहित करने में सहायक हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल व्यापक सामाजिक और मानवीय हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

नशे की समस्या से निपटने की अपील

अपने संबोधन में भागवत ने मादक पदार्थों की लत को गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज और परिवारों को मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए समय रहते कदम उठाने चाहिए। उन्होंने माता-पिता और बुजुर्गों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं में सही-गलत की पहचान करने और हानिकारक आदतों से दूर रहने की समझ विकसित करना जरूरी है।

नेपाल की बाढ़ और हिमालयी क्षेत्र के विकास का मुद्दा

भागवत ने नेपाल में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए हिमालयी क्षेत्र में विकास गतिविधियों के प्रभावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में हुए एकतरफा विकास के परिणाम इस क्षेत्र की चुनौतियों से जुड़े हो सकते हैं। यह उनका संबोधन में व्यक्त किया गया विचार था।

AI के इस्तेमाल में नैतिकता जरूरी

कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि लोगों को इस तकनीक को सीखना और उसके उपयोग में दक्ष होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने इसके इस्तेमाल में नैतिक सिद्धांतों का ध्यान रखने की जरूरत भी बताई।

उन्होंने AI की मदद से तैयार किए जा रहे फर्जी वीडियो और भ्रामक प्रचार को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए, ताकि इसका दुरुपयोग समाज में गलत सूचना फैलाने के लिए न किया जाए।

राष्ट्रीय एकता को बताया भावनात्मक बंधन

भागवत ने राष्ट्रीय एकता को किसी समझौते या लेन-देन के बजाय लोगों के बीच मौजूद भावनात्मक जुड़ाव से संबंधित बताया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को स्वीकार करना और अलग-अलग समुदायों की पहचान का सम्मान करना देश की परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें सामाजिक मतभेदों का इस्तेमाल कर असंतोष बढ़ाने और संस्थाओं के प्रति विश्वास कमजोर करने का प्रयास करती हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चेतना और मजबूत सामाजिक संबंध देश की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण हैं।

‘हिंदू दृष्टि’ और संतुलित विकास की बात

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में RSS प्रमुख ने सार्वभौमिक भाईचारे, आध्यात्मिकता और मानवता पर आधारित दृष्टिकोण की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा विकास मॉडल विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें भौतिक प्रगति के साथ सामाजिक और मानवीय पहलुओं को भी महत्व मिले।

भागवत ने हिंदू दृष्टिकोण को किसी एक पूजा-पद्धति, भाषा, खान-पान, पहनावे या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित मानने से इनकार किया। उनके अनुसार, इस विचार में विभिन्न समुदायों की अलग-अलग पहचान को बनाए रखते हुए व्यापक एकता स्थापित करने की क्षमता है।

उन्होंने विविधताओं के सम्मान और भावनात्मक एकता को देश की पारंपरिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि समाज की मजबूती के लिए इन मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने परंपरा के अनुसार शस्त्र पूजन भी किया।

नोट: इस रिपोर्ट में भागवत के संबोधन में व्यक्त विचारों और आरोपों को उनके बयानों के रूप में प्रस्तुत किया गया है; उन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

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