NGT सम्मेलन में राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं- पारंपरिक ज्ञान से मजबूत करें जलवायु अनुकूलन
NGT के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पर्यावरण प्रशासन, जलवायु लचीलापन और समुदाय आधारित उपायों पर जोर दिया। सम्मेलन में 17 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ का रविवार को समापन हुआ। समापन सत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संबोधित किया। उन्होंने पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जन-केंद्रित तथा समुदाय आधारित उपायों पर जोर दिया।
सम्मेलन में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल, सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
पर्यावरण प्रशासन में NGT की भूमिका अहम
राष्ट्रपति मुर्मु ने पर्यावरण प्रशासन को मजबूत करने में राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पारंपरिक ज्ञान को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, जल संकट और भूमि क्षरण जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सहयोग और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता पर मनोहर लाल ने बताया भारत का प्रदर्शन
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सतत शहरी विकास, जल सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन, हरित गतिशीलता और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी पहलों का उल्लेख किया।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सकारात्मक और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि पर्यावरण प्रशासन में विकास और संरक्षण के साथ-साथ वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन जरूरी है।
उन्होंने पर्यावरणीय मामलों में प्रभावी संस्थानों, पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय तक पहुंच को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता ह्रास और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए न्यायक्षेत्रों के बीच सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान जरूरी है।
कमजोर समुदायों और भविष्य की पीढ़ियों पर फोकस
NGT अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि सम्मेलन की चर्चाओं में केवल पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान करने के बजाय उनसे निपटने में सक्षम कानूनों, संस्थानों और साझेदारियों पर ध्यान दिया गया।
उन्होंने जलवायु कार्रवाई को समावेशी और न्यायसंगत बनाने तथा संवेदनशील समुदायों और भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने पर्यावरण कानून में तकनीक, नवाचार, सतत वित्त और न्यायसंगत बदलाव जैसे पहलुओं को शामिल करने पर भी जोर दिया।
कानून, विज्ञान और शासन के बीच तालमेल पर जोर
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए कानून, शासन, विज्ञान, अर्थशास्त्र और समाज के सामूहिक ज्ञान की आवश्यकता है।
उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए वैज्ञानिक आकलन, नवाचार और प्रभावी संस्थागत व्यवस्था को जरूरी बताया।
‘हरित न्यायम’ स्मारिका का विमोचन
सम्मेलन के दौरान मनोहर लाल ने NGT की ‘हरित न्यायम’ नामक स्मारिका का विमोचन किया और इसकी पहली प्रति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेंट की। इसमें NGT की स्थापना, विकास और उपलब्धियों के साथ सम्मेलन में सामने आए विचारों और सामूहिक संकल्प को दर्ज किया गया है।
17 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
NGT का यह दो दिवसीय सम्मेलन 19 और 20 सितंबर को आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर को इसका उद्घाटन किया था। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायविद, शिक्षाविद, नीति निर्माता, वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और एशियाई विकास बैंक (ADB) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
दूसरे दिन ‘प्लैनेटरी एनवायरनमेंटल चैलेंजेज एंड कोऑपरेशन’ और ‘फ्यूचर फॉर फॉरेस्ट्स: ए डायलॉग ऑन फॉरेस्ट प्रोटेक्शन एंड रिस्टोरेशन’ जैसे तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें सीमा पार पर्यावरणीय चुनौतियों, साझा प्राकृतिक संसाधनों, वन संरक्षण, जैव विविधता और वैज्ञानिक एवं सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का समापन पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को प्रभावी कार्रवाई में बदलने, मजबूत संस्थानों के निर्माण और सतत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साझा संकल्प के साथ हुआ।
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