ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा बयान, सटीक हमलों का जिक्र

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति की पुष्टि बताया। उन्होंने स्वदेशी हथियारों, नेटवर्क आधारित वायु रक्षा, ड्रोन रोधी क्षमता और 2047 तक तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर जोर दिया।

Oct 25, 2026 - 13:35
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ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का बड़ा बयान, सटीक हमलों का जिक्र

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने अपनी सटीक हमले करने की क्षमता और रणनीतिक तैयारी का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि पश्चिमी मोर्चे पर करीब 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और 200 किलोमीटर तक अंदर सटीक हमले करने की क्षमता ने वायुसेना की परिचालन पहुंच को प्रदर्शित किया। उनके मुताबिक, इस अभियान ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना किसी भी संकट के दौरान तेजी से कार्रवाई करने और दुश्मन की रणनीति का जवाब देने में सक्षम है।

क्षमता-केंद्रित रणनीति से मिली सफलता

एक विशेष साक्षात्कार में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण को मजबूत किया है। इस रणनीति में किसी एक विमान या हथियार पर निर्भर रहने के बजाय विमानों, सेंसर, हथियारों और नेटवर्क को एकीकृत करके काम किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों में कई विकल्प उपलब्ध होना जरूरी है। दुश्मन की रणनीति बदलने पर तेजी से उसके अनुरूप ढलना भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, अलग-अलग क्षमताओं के समन्वित इस्तेमाल से परिस्थितियों के अनुसार जवाबी कार्रवाई तय करने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद मिली।

स्वदेशी हथियारों और नेटवर्क आधारित प्रणालियों का प्रदर्शन

वायुसेना प्रमुख ने बताया कि अभियान के दौरान स्वदेश में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सफलता का श्रेय सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियानों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों और बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था के समन्वित इस्तेमाल को दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से इस्तेमाल किए गए ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, अलग-अलग प्रणालियों के एक साथ काम करने से वायुसेना को अभियान के दौरान बेहतर परिचालन क्षमता मिली।

भविष्य की चुनौतियों के लिए क्षमताएं बढ़ाने पर जोर

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि मौजूदा उपलब्धियों के बावजूद वायुसेना को अपनी क्षमताओं का विस्तार जारी रखना होगा। इसके लिए युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही यानी आईएसआर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निर्णय सहायता पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने मजबूत रसद व्यवस्था, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और स्वदेशी उत्पादन को भी अहम बताया। उनके अनुसार, लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाले सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए इन क्षेत्रों में लगातार सुधार आवश्यक है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा वायुसेना का दृष्टिकोण

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय वायुसेना का भविष्य का दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि भारत को सुरक्षित और किसी भी संकट का सामना करने में सक्षम बनाने में वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने 2047 तक भारतीय वायुसेना को दुनिया की सक्षम, नवोन्मेषी और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर वायु सेनाओं में शामिल करने का लक्ष्य बताया। इसके लिए पूरे देश के स्तर पर सहयोग और स्वदेशी तकनीक के विकास को जरूरी बताया गया।

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