PM Modi ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, जानिए ज्ञान का सार ग्रहण करने की सीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को श्रीमद्भागवतपुराणम् के एकादश स्कंध के अध्याय 8 का 10वां श्लोक साझा किया। इसमें भौंरे के उदाहरण के जरिए हर स्रोत से उपयोगी ज्ञान का सार ग्रहण करने और जीवन में उसे अपनाने की सीख दी गई है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर श्रीमद्भागवतपुराणम् का एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। यह श्लोक एकादश स्कंध के अध्याय 8 के 10वें श्लोक से लिया गया है। इसमें मनुष्य को अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले ज्ञान में से उपयोगी और श्रेष्ठ तत्व को ग्रहण करने की प्रेरणा दी गई है।
भौंरे के उदाहरण से समझाया ज्ञान का महत्व
श्लोक में भौंरे का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि जिस तरह भौंरा अलग-अलग फूलों से केवल मधुरस ग्रहण करता है, उसी तरह विवेकशील व्यक्ति को भी छोटे-बड़े सभी ज्ञान स्रोतों से उपयोगी सार को आत्मसात करना चाहिए।
इसका संदेश है कि ज्ञान का मूल्य केवल उसके स्रोत या आकार से तय नहीं होता। कोई छोटी पुस्तक, किसी सामान्य व्यक्ति की बात या किसी बड़े विद्वान का विचार—अगर उसमें उपयोगी और सत्य बात है, तो उसे समझकर अपनाया जाना चाहिए।
दत्तात्रेय जी के 24 गुरुओं से जुड़ा प्रसंग
यह शिक्षा दत्तात्रेय जी से जुड़े उस प्रसंग का हिस्सा है, जिसमें अवधूत ब्राह्मण यदुराज को अपने 24 गुरुओं से मिली शिक्षाओं के बारे में बताते हैं। इन गुरुओं में प्रकृति और उसके विभिन्न तत्वों से प्राप्त अनुभव भी शामिल हैं।
भौंरे से मिली शिक्षा के माध्यम से यह समझाया गया है कि संसार में ज्ञान का भंडार बहुत व्यापक है। हर शास्त्र को पूरी तरह पढ़ना और उसके प्रत्येक पक्ष को समझना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। ऐसे में बुद्धिमानी यह है कि व्यक्ति ज्ञान के विस्तार में उलझने के बजाय उसके सार को पहचाने।
ज्ञान के विवाद में न उलझने का संदेश
इस सुभाषित में केवल ज्ञान प्राप्त करने की बात नहीं कही गई, बल्कि उसके सही उपयोग पर भी जोर दिया गया है। व्यक्ति को शास्त्रों के नियमों, व्याकरण और अलग-अलग मतों के विवाद में इस तरह नहीं उलझना चाहिए कि ज्ञान का मूल उद्देश्य ही पीछे छूट जाए।
ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाना, सही सोच विकसित करना और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ना है। इसलिए जरूरी है कि उपयोगी ज्ञान को पहचाना जाए और उसे व्यवहार में उतारा जाए।
PM Modi की पोस्ट ने फिर सामने रखा भारतीय ज्ञान परंपरा का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संस्कृत सुभाषित साझा किए जाने से भारतीय ज्ञान परंपरा की एक महत्वपूर्ण सीख सामने आती है। यह संदेश आज के दौर में भी प्रासंगिक है कि जानकारी के विशाल संसार में व्यक्ति को हर बात को बिना सोचे अपनाने के बजाय विवेक के साथ उपयोगी ज्ञान का चयन करना चाहिए।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)