वेस्ट बैंक में E1 बस्ती योजना पर बढ़ा विवाद, 1,234 घरों के टेंडर से अंतरराष्ट्रीय दबाव
वेस्ट बैंक के E1 क्षेत्र में 1,234 आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए जारी टेंडर को लेकर अंतरराष्ट्रीय विरोध बढ़ गया है। E1 की 3,401 घरों की व्यापक योजना को लेकर EU और संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी चिंता जताई गई है।
इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के E1 क्षेत्र में 1,234 आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए जारी टेंडर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। यह टेंडर E1 क्षेत्र में प्रस्तावित 3,401 आवासीय इकाइयों की बड़ी योजना का हिस्सा है। इजरायल ने अगस्त 2026 में इसके लिए बोली प्रक्रिया शुरू की थी और आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
यूरोपीय संघ ने जताई आपत्ति
E1 योजना को लेकर यूरोपीय संघ ने कहा है कि इससे दो-देश समाधान की संभावनाओं को नुकसान पहुंच सकता है। यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख के कार्यालय की ओर से जारी बयान में इजरायल से टेंडर वापस लेने और E1 समेत अन्य बस्ती विस्तार योजनाओं को रोकने की अपील की गई थी। EU के अनुसार, E1 योजना लागू होने पर वेस्ट बैंक के क्षेत्रीय संपर्क और पूर्वी यरुशलम से उसके जुड़ाव पर असर पड़ सकता है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी दो-देश समाधान को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यूरोप की जिम्मेदारी है कि इजरायल और फिलिस्तीन के लिए दो-देश समाधान की संभावना बनी रहे।
क्या है E1 परियोजना?
E1 यानी ‘ईस्ट-1’ क्षेत्र पूर्वी यरुशलम और इजरायली बस्ती माले अदुमीम के बीच स्थित है। इस इलाके को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। E1 में निर्माण की योजना को आगे बढ़ाने से माले अदुमीम और पूर्वी यरुशलम के बीच इजरायली बस्ती क्षेत्र का विस्तार हो सकता है।
आलोचकों का कहना है कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण से वेस्ट बैंक के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच फिलिस्तीनी क्षेत्रीय संपर्क प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से E1 परियोजना को इजरायल-फिलिस्तीन विवाद में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है।
3,401 घरों की है व्यापक योजना
वर्तमान टेंडर में 1,234 आवासीय इकाइयां शामिल हैं, जबकि E1 क्षेत्र के लिए कुल 3,401 आवासीय इकाइयों की योजना स्वीकृत है। अगस्त 2026 में जारी टेंडर को योजना के अनुमोदन से आगे बढ़कर निर्माण प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है। हालांकि टेंडर जारी होने का मतलब यह नहीं है कि निर्माण तत्काल शुरू हो गया है।
इजरायल में इस योजना को लेकर कानूनी चुनौती भी जारी है। सितंबर 2026 में यरुशलम जिला अदालत ने टेंडर को आगे बढ़ने की अनुमति दी, लेकिन निर्माण योजना की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया।
संयुक्त राष्ट्र की भी आपत्ति
E1 क्षेत्र में बस्ती विस्तार को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने पहले भी चिंता जताई है। मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इजरायल से E1 में बस्ती विस्तार रोकने और खान अल-अहमर समुदाय को जबरन विस्थापित किए जाने की प्रक्रिया रोकने की अपील की थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, क्षेत्र में स्वीकृत 3,401 आवासीय इकाइयों की योजना कई फिलिस्तीनी समुदायों को प्रभावित कर सकती है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 के संदर्भ में भी कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में बस्ती गतिविधियों को रोकने की मांग दोहराई गई है। संयुक्त राष्ट्र की 2026 की रिपोर्ट में वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बस्ती गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख किया गया है।
दशकों पुरानी है E1 योजना
E1 क्षेत्र में इजरायली योजना की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में योजना को आगे बढ़ाने की कोशिशें होती रहीं, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के विरोध के कारण आवासीय निर्माण को कई बार रोका गया।
क्षेत्र में बुनियादी ढांचे से जुड़े कुछ काम पहले ही किए जा चुके हैं, लेकिन हजारों आवासीय इकाइयों के निर्माण की दिशा में टेंडर जारी होना एक नया चरण माना जा रहा है।
चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है टेंडर?
E1 टेंडर के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर है, जबकि इजरायल में आम चुनाव 27 अक्टूबर को होने हैं। इस वजह से टेंडर की टाइमिंग भी चर्चा में है। इजरायल के एक रणनीतिक अध्ययन संस्थान INSS के अनुसार, टेंडर जारी होने से योजना स्वीकृति के चरण से आगे बढ़कर संभावित कार्यान्वयन के करीब पहुंची है, हालांकि निर्माण शुरू होने से पहले अभी कई प्रक्रियाएं बाकी हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच E1 परियोजना एक बार फिर इजरायल-फिलिस्तीन विवाद, वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार और दो-देश समाधान को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है।
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