BRICS Summit 2026: पीएम मोदी बोले- भू-राजनीतिक तनाव से आम लोगों पर असर, ग्लोबल साउथ के लिए मिलकर काम करें

BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उसके आम लोगों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने ग्लोबल साउथ के समावेशी विकास और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए BRICS देशों से मिलकर काम करने की अपील की।

Sep 13, 2026 - 13:38
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BRICS Summit 2026: पीएम मोदी बोले- भू-राजनीतिक तनाव से आम लोगों पर असर, ग्लोबल साउथ के लिए मिलकर काम करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऐसे समय में BRICS देशों को एकजुट होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा और खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे।

18वें BRICS शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के इस्तेमाल को रणनीतिक दबाव के साधन के तौर पर किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां साझा विकास और वैश्विक समृद्धि की राह में बाधा पैदा कर सकती हैं।

BRICS नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी का संबोधन

पीएम मोदी ने BRICS के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में यह बात कही। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई नेता मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान प्रयासों को चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता—पर केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के सहयोग से साझा सोच को ऐसे ठोस प्रयासों में बदलने की कोशिश की गई है, जिनसे सभी पक्षों को लाभ मिल सके।

महामारी और आपदा से मिली बड़ी सीख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु संबंधी आपदाएं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान यह दिखा चुके हैं कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में किसी एक क्षेत्र में पैदा हुआ संकट दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।

इसी वजह से BRICS के भीतर लचीलापन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि संभावित चुनौतियों की समय रहते पहचान करना, उनके लिए तैयारी रखना और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।

संक्रामक रोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली

पीएम मोदी ने बताया कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे निपटने के लिए BRICS एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को लेकर सहमति बनी है। इसके साथ ही प्रारंभिक चेतावनी से जुड़े आंकड़ों को एकीकृत करने की व्यवस्था के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं।

इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य संबंधी संभावित खतरों की पहचान और उनके प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया को मजबूत करना है।

मजबूत होंगी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं

प्रधानमंत्री ने BRICS लॉजिस्टिक सप्लाई चेन सहयोग ढांचे को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सदस्य देशों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।

वहीं, नवाचार के क्षेत्र में BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क के जरिए स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे नए उद्यमों को मार्गदर्शन, विशेषज्ञता और सहयोग के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

ग्लोबल साउथ का BRICS पर बढ़ा भरोसा

पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए BRICS देशों को सामूहिक रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के बीच BRICS को लेकर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, BRICS को वैश्विक सहयोग, समावेशी विकास और साझा प्रगति के लिए अपनी भूमिका को और मजबूत करना होगा। भारत की अध्यक्षता के दौरान इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर जोर दिया गया है।

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