Global Gender Gap Index 2026: भारत 131वें स्थान पर बरकरार, आइसलैंड फिर नंबर-1

WEF Global Gender Gap Index 2026 में भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर रहा। भारत का लैंगिक समानता स्कोर 64.5% है, जबकि आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे शीर्ष तीन स्थानों पर हैं।

Sep 16, 2026 - 16:18
0 0
Global Gender Gap Index 2026: भारत 131वें स्थान पर बरकरार, आइसलैंड फिर नंबर-1

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के Global Gender Gap Index 2026 में भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का लैंगिक समानता स्कोर 64.5 प्रतिशत रहा। वहीं आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे ने क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर जगह बनाई है।

रिपोर्ट में लैंगिक समानता को आर्थिक भागीदारी एवं अवसर, शैक्षणिक उपलब्धि, स्वास्थ्य एवं जीवन रक्षा तथा राजनीतिक सशक्तीकरण जैसे चार प्रमुख आयामों के आधार पर मापा गया है।

आइसलैंड सबसे आगे, फिनलैंड और नॉर्वे दूसरे-तीसरे स्थान पर

2026 की सूची में आइसलैंड शीर्ष पर है। इसके बाद फिनलैंड और नॉर्वे का स्थान है। शीर्ष 10 में नामीबिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और आयरलैंड भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक नामीबिया चार पायदान ऊपर चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंचा है और उप-सहारा अफ्रीका में सबसे ऊंची रैंकिंग वाला देश बना है। ऑस्ट्रेलिया पहली बार शीर्ष 10 में शामिल हुआ है।

भारत से नीचे 14 देश हैं, जिनमें पापुआ न्यू गिनी, कुवैत, ओमान, कतर, ताजिकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र, मोरक्को, माली, अल्जीरिया और कांगो सहित अन्य देश शामिल हैं। चाड सबसे निचले स्थान पर रहा, जबकि ईरान और पाकिस्तान भी निचले तीन देशों में शामिल हैं।

वैश्विक लैंगिक अंतराल 69.2 प्रतिशत तक कम

WEF के अनुसार 2026 में वैश्विक स्तर पर लैंगिक अंतराल 69.2 प्रतिशत तक कम हुआ है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 0.4 प्रतिशत अंक का सुधार है। सूचकांक में 100 प्रतिशत को पूर्ण लैंगिक समानता माना जाता है।

हालांकि, मौजूदा प्रगति की रफ्तार को देखते हुए वैश्विक स्तर पर पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने में अभी लंबा समय लगने का अनुमान है। WEF के पिछले संस्करण में भी कहा गया था कि वर्तमान गति पर पूर्ण समानता तक पहुंचने में एक सदी से अधिक समय लग सकता है।

भारत का कुल लैंगिक समानता स्कोर 64.5 प्रतिशत

रिपोर्ट के अनुसार भारत का 2026 में लैंगिक समानता स्कोर 64.5 प्रतिशत रहा। पिछले वर्ष की तुलना में स्कोर में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वैश्विक रैंकिंग 131वें स्थान पर ही बनी रही।

2006 के बाद से भारत के स्कोर में कुल 4.3 प्रतिशत अंक का सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति ने इस दीर्घकालिक सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आर्थिक भागीदारी में स्कोर 41.2 प्रतिशत

आर्थिक भागीदारी एवं अवसर के क्षेत्र में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 41.2 प्रतिशत रहा। यह पिछले संस्करण से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है।

पेशेवर और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लंबे समय के दौरान सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में भारत का समानता स्तर 2006 के 26.6 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 49.9 प्रतिशत हो गया।

हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रबंधकों और अन्य उच्च पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

वरिष्ठ पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी कम

जन प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व में 2006 के बाद सुधार हुआ है। इसके बावजूद 2026 में इस क्षेत्र का समानता स्तर 13.1 प्रतिशत रहा।

वहीं श्रमबल में भागीदारी के मामले में लैंगिक समानता का स्तर 2026 में 44.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।

शिक्षा में भारत का प्रदर्शन 96.6 प्रतिशत

शैक्षणिक उपलब्धि के मामले में भारत का लैंगिक समानता स्कोर 96.6 प्रतिशत रहा। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इसमें 0.5 प्रतिशत अंक की कमी आई।

स्वास्थ्य एवं जीवन रक्षा के क्षेत्र में भारत का स्कोर बढ़कर 95.6 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट में जन्म के समय लिंगानुपात से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है।

राजनीतिक सशक्तीकरण में भारत की स्थिति

2026 में भारत का चारों उप-सूचकांकों में सबसे बेहतर प्रदर्शन राजनीतिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में रहा। इस श्रेणी में भारत को वैश्विक स्तर पर 67वां स्थान मिला और लैंगिक अंतराल को 24.5 प्रतिशत तक कम किया गया।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार 2021 के बाद भारत के राजनीतिक सशक्तीकरण स्कोर में गिरावट दर्ज हुई है और 2026 में यह 40.7 प्रतिशत रहा।

संसद और मंत्रिमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में भारतीय संसद में लैंगिक समानता का स्तर 16.1 प्रतिशत रहा। 2006 की तुलना में इसमें करीब 7 प्रतिशत अंक का सुधार दर्ज किया गया है।

मंत्रिस्तरीय स्तर पर समानता का स्कोर 2026 में 5.9 प्रतिशत रहा, जबकि 2006 में यह 3.5 प्रतिशत था। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह स्तर 2019 में दर्ज 30 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है।

CEO और AI क्षेत्र में भी बड़ा अंतर

WEF रिपोर्ट में कॉर्पोरेट और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी आंकड़े दिए गए हैं। इसके अनुसार CEO पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 19.1 प्रतिशत है।

AI इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी पांच में एक से भी कम बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक AI कंपनियों में भी विभिन्न स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में कम है।

WEF ने कहा- लैंगिक समानता हासिल करना संभव

WEF की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने रिपोर्ट के संदर्भ में कहा कि दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि लैंगिक समानता हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार अलग-अलग प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में प्रगति दर्ज हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2006 से अब तक आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन चार ऐसी अर्थव्यवस्थाएं हैं जो हर संस्करण में शीर्ष 10 में बनी रही हैं। आइसलैंड एकमात्र ऐसा देश है जिसने लैंगिक अंतराल को 90 प्रतिशत से अधिक तक बंद किया है। WEF के 2025 संस्करण में भी आइसलैंड 92.6 प्रतिशत स्कोर के साथ पहले स्थान पर था।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User