India-Philippines Relations: भारत-फिलीपींस संबंधों में बढ़ी मजबूती, रणनीतिक साझेदारी पर बोले राजदूत

ICWA के सिल्वर जुबली समारोह में फिलीपींस के राजदूत जोसेल इग्नासियो ने भारत-फिलीपींस संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर बात की। चिली के राजदूत ने भी भारत की सॉफ्ट पावर और तकनीकी क्षमता का उल्लेख किया।

Sep 16, 2026 - 11:00
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India-Philippines Relations: भारत-फिलीपींस संबंधों में बढ़ी मजबूती, रणनीतिक साझेदारी पर बोले राजदूत

नई दिल्ली में भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद (ICWA) के सिल्वर जुबली समारोह के समापन सत्र में भारत-फिलीपींस संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। भारत में फिलीपींस के राजदूत जोसेल फ्रांसिस्को इग्नासियो ने कहा कि पिछले करीब एक दशक में दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय तेजी आई है और 2025 में इन्हें रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया।

रणनीतिक साझेदारी से रिश्तों को मिली नई दिशा

इग्नासियो ने कहा कि भारत और फिलीपींस के राजनयिक संबंध करीब 77 साल पुराने हैं, लेकिन पिछले लगभग 10 वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग में स्पष्ट विस्तार देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष फिलीपींस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने की घोषणा की थी। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और सहयोग हाल के वर्षों में बढ़ा है।

समुद्री क्षेत्र में भारत को महत्वपूर्ण साझेदार मानता है फिलीपींस

फिलीपींस के राजदूत ने कहा कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल के बीच उनका देश भारत को आपसी और रणनीतिक विश्वास वाला महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।

उन्होंने विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में सहयोग का उल्लेख किया। उनके मुताबिक फिलीपींस भारत को एक जिम्मेदार पक्ष और महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में संकट की परिस्थितियों में फिलीपींस के समुद्री यात्रियों को भारत से मिली सहायता का भी जिक्र किया।

आसियान के लिए भारत को बताया ज्ञान का स्रोत

इग्नासियो ने भारत को आसियान देशों और विशेष रूप से फिलीपींस के लिए ज्ञान और अनुभव का महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि फिलीपींस भारत को एक मूल्यवान साझेदार के तौर पर देखता है और विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

चिली के राजदूत ने भारत की सॉफ्ट पावर का किया उल्लेख

कार्यक्रम में भारत में चिली के राजदूत जुआन रोलांडो अंगुलो मोन्साल्वे ने भी भारत के वैश्विक प्रभाव और लैटिन अमेरिकी देशों के साथ उसके संबंधों पर विचार रखे।

उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका में भारत को एक मित्रवत देश के तौर पर देखा जाता है और वहां भारत की सॉफ्ट पावर को महत्व दिया जाता है। उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिकी समाजों के बीच परिवार, संस्कृति और आध्यात्मिकता जैसे क्षेत्रों में समानताओं का भी उल्लेख किया।

IT, फार्मा और स्पेस में भारत की क्षमता

चिली के राजदूत ने तकनीक और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं की चर्चा करते हुए IT, फार्मास्युटिकल्स, अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक को प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि लैटिन अमेरिका में भारत की भागीदारी बढ़ रही है और दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग के लिए संभावनाएं मौजूद हैं।

उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में लैटिन अमेरिकी देशों में भारत की राजनयिक मौजूदगी बढ़ने का भी उल्लेख किया।

जयशंकर ने ग्लोबल साउथ और AI को बताया महत्वपूर्ण

ICWA के सिल्वर जुबली समारोह के समापन संबोधन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक परिदृश्य और भारत की विदेश नीति से जुड़े कई पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं, बदलते वैश्विक कार्यबल, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और नए संचार परिवेश का उल्लेख किया।

जयशंकर ने AI के दौर में संचार और नैरेटिव निर्माण में हो रहे बदलाव, ग्लोबल साउथ के साथ भारत के संबंधों और बहुध्रुवीयता तथा रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि ICWA थिंक टैंक, अकादमिक जगत और नीति-निर्माताओं के लिए संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना रह सकता है और वैश्विक स्तर पर भारत के दृष्टिकोण को सामने रखने में भूमिका निभा सकता है।

1943 में हुई थी ICWA की स्थापना

भारतीय वैश्विक मामलों की परिषद की स्थापना 1943 में भारतीय बुद्धिजीवियों के एक समूह ने की थी। शुरुआत में यह सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत गैर-आधिकारिक, गैर-राजनीतिक और गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत थी। संसद के एक अधिनियम के जरिए 2001 में ICWA को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया गया। भारत के उपराष्ट्रपति ICWA के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

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