LAC पर चीन की सैन्य तैनाती में कमी, LoC पर घुसपैठ की कोशिशें घटीं; ड्रोन खतरा बढ़ा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025 में LAC के आसपास चीनी सेना की तैनाती में कमी आई, जबकि भारतीय सेना ने रणनीतिक तैनाती बरकरार रखी। LoC पर छह घुसपैठ प्रयासों में 12 पाकिस्तानी आतंकी मारे गए और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 863 ड्रोन घुसपैठ के मामले सामने आए।
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी संवाद का असर सीमा की स्थिति पर भी दिखाई दिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में उत्तरी मोर्चे पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीनी सेना की तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, LAC और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीन की करीब 10 संयुक्त हथियार ब्रिगेड के आकार की टुकड़ियां तैनात रहीं।
इसके समानांतर भारतीय सेना ने सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपनी मजबूत और रणनीतिक रूप से उपयुक्त तैनाती बनाए रखी।
भारत-चीन बातचीत से सीमा पर स्थिरता
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन के बीच विभिन्न स्तरों पर जारी बातचीत ने सीमा पर स्थिरता बनाए रखने में भूमिका निभाई। कार्यकारी तंत्र की बैठकें, विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता, कोर कमांडर स्तर की बातचीत और सीमा कार्मिक बैठकें लगातार होती रहीं।
इन बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी चिंता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की। सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी रहने से सीमा प्रबंधन में संवाद का रास्ता खुला रहा।
LoC पर घुसपैठ की कोशिशों में आई कमी
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2025 में नियंत्रण रेखा (LoC) पर आतंकियों की ओर से घुसपैठ की छह कोशिशें की गईं। इन अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने 12 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में LoC पर घुसपैठ के प्रयासों में कमी दर्ज हुई। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, आतंकियों की गतिविधियों का फोकस अब अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े क्षेत्रों की ओर भी बढ़ा है। इसमें हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
2025 में LoC पर 163 सीजफायर उल्लंघन
LoC पर संघर्ष विराम उल्लंघन के मामलों में वर्ष 2025 के दौरान बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पूरे साल 163 संघर्ष विराम उल्लंघन हुए, जबकि 2024 में ऐसे केवल दो मामले दर्ज किए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 163 में से 124 उल्लंघन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए। इससे उस अवधि में सीमा पर बढ़े तनाव की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर में 19 आतंकी मारे गए
जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में भी 2025 के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रहे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अभियानों में 19 आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें आठ पाकिस्तानी आतंकी थे।
मंत्रालय ने इन आंकड़ों को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देने और सीमा पार से चलाए जा रहे छद्म युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ बड़ी चुनौती
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में ड्रोन गतिविधियों को भी सुरक्षा के लिए उभरती चुनौती बताया गया है। वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 863 ड्रोन घुसपैठ के मामले सामने आए।
इनमें जम्मू-कश्मीर में नौ मामले, जबकि पंजाब और राजस्थान में कुल 854 मामले दर्ज किए गए। सुरक्षा बलों ने ड्रोन की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए स्पूफर और जैमर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया।
237 ड्रोन गिराए गए
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 237 ड्रोन गिराए गए। इनमें पांच ड्रोन युद्ध जैसी सामग्री लेकर आए थे। वहीं, 72 ड्रोन में मादक पदार्थ पाए गए, जबकि 161 ड्रोन बिना किसी सामान के थे।
इन आंकड़ों से सीमा पार से निगरानी, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की चुनौती का संकेत मिलता है।
हथियार और प्रतिबंधित सामग्री बरामद
अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास सुरक्षा बलों ने कार्रवाई के दौरान दो AK-47 राइफलें, 75 पिस्तौल और 281.41 किलोग्राम प्रतिबंधित सामग्री बरामद की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बरामद सामग्री के कुछ हिस्से को ड्रोन के जरिए सीमा पार से पहुंचाए जाने की आशंका है।
मंत्रालय का आकलन है कि विरोधी पक्ष हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की तस्करी के साथ-साथ निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। इस चुनौती को देखते हुए पंजाब समेत अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में ड्रोन गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
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