Trump on Drugs: ट्रंप ने PM मोदी के मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों की सराहना की, सहयोग जारी रखने की बात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादक पदार्थों के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रयासों का स्वागत किया है। अमेरिका ने भारत के साथ काउंटर-नार्कोटिक्स सहयोग जारी रखने की बात कही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादक पदार्थों की अवैध तस्करी और उत्पादन के खिलाफ भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के मादक पदार्थों के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों की सराहना की है।
अमेरिकी पक्ष ने विशेष रूप से अवैध अफीम की खेती को रोकने और मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया है। साथ ही अमेरिका ने भारत के साथ मादक पदार्थ नीति और उसके खिलाफ कार्रवाई के क्षेत्र में सहयोग आगे भी जारी रखने की बात कही है।
भारत के प्रयासों की अमेरिकी प्रशासन ने की सराहना
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रयासों का स्वागत किया गया। बयान में अवैध अफीम की खेती पर रोक लगाने और ड्रग सप्लाई चेन की निगरानी तथा मजबूती से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया गया।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा कि दोनों देश अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। यह सहयोग नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, आपूर्ति नेटवर्क पर कार्रवाई और संबंधित नीतिगत समन्वय जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है।
2027 की अमेरिकी सूची में भारत भी शामिल
अमेरिकी प्रशासन ने भारत को वर्ष 2027 के लिए प्रमुख अवैध मादक पदार्थ उत्पादक या पारगमन देशों की सूची में शामिल किया है। इस सूची में अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, बर्मा, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला सहित अन्य देश भी शामिल हैं।
हालांकि, अमेरिकी व्यवस्था के तहत किसी देश का इस सूची में होना यह नहीं दर्शाता कि उसकी सरकार मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है। यह वर्गीकरण मुख्य रूप से उन भौगोलिक, वाणिज्यिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखता है, जिनके कारण कोई देश मादक पदार्थों के उत्पादन या पारगमन का केंद्र बन सकता है।
भारत-अमेरिका के बीच ड्रग्स के खिलाफ सहयोग
भारत और अमेरिका के बीच मादक पदार्थों की तस्करी रोकने को लेकर पहले से सहयोग का ढांचा मौजूद है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग में काउंटर-नार्कोटिक्स भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मुलाकात में भी आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ सहयोग मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।
ताजा अमेरिकी बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन भारत के साथ इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की नीति पर कायम है।
ट्रंप ने अपने प्रशासन की उपलब्धियां भी गिनाईं
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादक पदार्थों की तस्करी और नार्कोटेररिस्ट संगठनों के खिलाफ अपने प्रशासन की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए इसे महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उन्होंने सीमा सुरक्षा मजबूत करने, मादक पदार्थों की जब्ती में कमी और ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतों में गिरावट का दावा किया।
ट्रंप ने अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर मादक पदार्थों की जब्ती में बड़ी कमी आने और ओवरडोज से होने वाली मौतों में गिरावट का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और दावे अमेरिकी प्रशासन के अपने आकलन के रूप में सामने रखे गए हैं।
आगे भी जारी रहेगा सहयोग
अमेरिका की ओर से भारत के मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों की सराहना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश सुरक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
भारत के लिए मादक पदार्थों की तस्करी से निपटना केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि सीमा सुरक्षा, वित्तीय अपराध और संगठित अपराध से भी जुड़ा मुद्दा है। अमेरिका के साथ सहयोग के तहत खुफिया जानकारी साझा करने, तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई और नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति को रोकने जैसे क्षेत्रों में समन्वय महत्वपूर्ण हो सकता है।
अमेरिकी प्रशासन का ताजा रुख यह दर्शाता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में काउंटर-नार्कोटिक्स सहयोग को भी एक महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।
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