PM Kisan Maandhan Yojana: किसानों के बुढ़ापे का सहारा बनी PM-KMY, 7 साल में करीब 25 लाख जुड़े
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) ने सितंबर 2026 में सात वर्ष पूरे किए। योजना के तहत पात्र छोटे और सीमांत किसानों को 60 वर्ष की उम्र के बाद न्यूनतम 3,000 रुपये मासिक पेंशन देने का प्रावधान है। फरवरी 2026 तक करीब 25 लाख किसान इससे जुड़ चुके थे।
भारत की कृषि व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। खेती से जुड़ी आय मौसम, बाजार और अन्य परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों के कामकाजी जीवन के बाद आर्थिक सुरक्षा भी किसान कल्याण का अहम हिस्सा बन जाती है। इसी उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) ने सितंबर 2026 में सात वर्ष पूरे कर लिए हैं।
12 सितंबर 2019 को शुरू हुई PM-KMY एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है, जिसका उद्देश्य पात्र छोटे और सीमांत किसानों को वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद न्यूनतम ₹3,000 मासिक पेंशन का प्रावधान है।
18 से 40 वर्ष की उम्र में ले सकते हैं योजना का लाभ
PM-KMY में 18 से 40 वर्ष की आयु के पात्र छोटे और सीमांत किसान शामिल हो सकते हैं। योजना के तहत किसान अपनी उम्र के अनुसार निर्धारित अंशदान करते हैं और केंद्र सरकार भी किसान के अंशदान के बराबर राशि का योगदान करती है।
योजना का उद्देश्य किसानों को खेती के सक्रिय वर्षों के बाद नियमित पेंशन के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर पात्र लाभार्थी को कम से कम ₹3,000 प्रति माह पेंशन मिलती है।
करीब 25 लाख किसान योजना से जुड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी 2026 तक PM-KMY में 24,96,252 किसान नामांकित हो चुके थे। राज्यवार आंकड़ों में हरियाणा लगभग 5.75 लाख नामांकन के साथ आगे रहा, जबकि बिहार में 3.46 लाख से अधिक किसान योजना से जुड़े थे।
उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी नामांकन 2.5 लाख से अधिक दर्ज किया गया। छत्तीसगढ़ में दो लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हुआ। इन आंकड़ों से योजना की देशभर में पहुंच का पता चलता है।
योजना पर अब तक ₹540.66 करोड़ का उपयोग
PM-KMY के क्रियान्वयन और पहुंच बढ़ाने के लिए भी सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है। PIB के अनुसार, योजना शुरू होने से फरवरी 2026 तक देशभर में ₹540.66 करोड़ का उपयोग किया जा चुका था।
सरकार के अनुसार, योजना का उद्देश्य केवल पेंशन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना भी है।
परिवार के लिए भी पेंशन का प्रावधान
PM-KMY में लाभार्थी की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी के लिए भी पारिवारिक पेंशन का प्रावधान है। योजना की शर्तों के अनुसार, पात्र जीवनसाथी को सब्सक्राइबर की पेंशन का 50 प्रतिशत या ₹1,500 प्रति माह, जो लागू हो, पारिवारिक पेंशन के रूप में मिल सकता है।
इस प्रावधान का उद्देश्य किसान के निधन के बाद उसके परिवार को भी कुछ हद तक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
खेती के बाद की जिंदगी पर आर्थिक सुरक्षा का जोर
छोटे और सीमांत किसानों के लिए वृद्धावस्था में नियमित आय का इंतजाम करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खेती पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति कई बार मौसम और बाजार की परिस्थितियों से प्रभावित होती है।
ऐसे में PM-KMY पेंशन आधारित सामाजिक सुरक्षा का विकल्प उपलब्ध कराती है। योजना का मूल विचार यह है कि किसान के कामकाजी वर्षों के बाद भी उसके पास न्यूनतम नियमित आय का एक स्रोत मौजूद रहे।
किसान कल्याण में सामाजिक सुरक्षा का नया आयाम
किसान कल्याण को केवल कृषि उत्पादन और आय सहायता तक सीमित नहीं माना जा सकता। वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। PM-KMY इसी पहलू को केंद्र में रखती है और छोटे तथा सीमांत किसानों को पेंशन व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास करती है।
सरकार की अन्य किसान-केंद्रित योजनाओं के साथ देखें तो सामाजिक सुरक्षा कृषि परिवारों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता से जुड़ा एक अलग आयाम है। उदाहरण के लिए, केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में PM-KISAN को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दी है।
सात साल पूरे होने के बाद आगे की चुनौती
PM-KMY के सात साल पूरे होने के साथ योजना के सामने अगली चुनौती इसकी पहुंच को पात्र किसानों तक और व्यापक बनाने की है। खासतौर पर उन किसानों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है, जो औपचारिक पेंशन व्यवस्था से बाहर हैं।
किसानों के लिए पेंशन सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ जागरूकता, आसान नामांकन और योजना की निरंतर पहुंच भी महत्वपूर्ण रहेगी। लगभग 25 लाख नामांकन तक पहुंचना योजना के विस्तार को दर्शाता है, लेकिन देश के विशाल किसान समुदाय को देखते हुए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की गुंजाइश बनी हुई है।
PM-KMY की सात वर्ष की यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि किसान कल्याण में केवल वर्तमान आय और उत्पादन ही नहीं, बल्कि जीवन के बाद के वर्षों की आर्थिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। खेती में योगदान देने वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए पेंशन व्यवस्था को मजबूत करना इसी व्यापक सामाजिक सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा है।
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