RoDTEP योजना को 5 साल बढ़ाने की मांग, निर्यातकों को मिल सकती है बड़ी राहत
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों के लिए RoDTEP योजना को पांच साल और जारी रखने की मांग की है। मौजूदा योजना 30 सितंबर को समाप्त हो रही है और विस्तार को लेकर व्यय विभाग से चर्चा चल रही है।
निर्यातकों को राहत देने वाली RoDTEP योजना को आगे जारी रखने की तैयारी शुरू हो गई है। वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की वापसी (RoDTEP) योजना की अवधि पांच साल बढ़ाने की मांग की है। मौजूदा व्यवस्था 30 सितंबर को समाप्त होने वाली है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इस संबंध में वाणिज्य मंत्रालय और व्यय विभाग के बीच बातचीत चल रही है।
30 सितंबर को खत्म हो रही है योजना
RoDTEP योजना का मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होना है। मंत्रालय चाहता है कि निर्यातकों को मिलने वाली इस सुविधा को आगे भी जारी रखा जाए। अधिकारी के अनुसार, पिछले वर्ष योजना पर हुए खर्च और इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए व्यय विभाग के साथ चर्चा की जा रही है।
सरकार की ओर से अंतिम फैसला होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना को किस अवधि और किन शर्तों के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
क्या है RoDTEP योजना?
RoDTEP का पूरा नाम Remission of Duties and Taxes on Exported Products है। भारत सरकार ने इसे जनवरी 2021 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य निर्यातित वस्तुओं के उत्पादन और उनकी आपूर्ति से जुड़ी ऐसी लागत को कम करना है, जिसमें लगाए गए कुछ करों, शुल्कों और उपकरों की किसी अन्य व्यवस्था के तहत वापसी नहीं हो पाती।
योजना के तहत पात्र निर्यातकों को निर्धारित दर के अनुसार रिफंड या रिमिशन का लाभ मिलता है। इससे भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत प्रतिस्पर्धा को समर्थन देने का प्रयास किया जाता है।
0.3 से 3.9 प्रतिशत तक मिलता है लाभ
RoDTEP के तहत अलग-अलग उत्पादों के लिए अलग दरें निर्धारित हैं। मौजूदा व्यवस्था में यह लाभ 0.3 प्रतिशत से लेकर 3.9 प्रतिशत तक बताया गया है।
योजना का लाभ उत्पाद और संबंधित निर्यात व्यवस्था के आधार पर तय होता है। इसका मकसद उन अप्रत्यक्ष करों और शुल्कों की भरपाई करना है, जिन्हें निर्यातक किसी अन्य माध्यम से वापस नहीं ले पाते।
2025-26 में ₹18,232 करोड़ का बजट
वित्त वर्ष 2025-26 में RoDTEP योजना के लिए 18,232 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मंत्रालय की पांच साल की विस्तार मांग पर व्यय विभाग के साथ होने वाली चर्चा में योजना के खर्च और भविष्य की वित्तीय जरूरतों पर भी विचार किया जा रहा है।
निर्यातकों के लिए क्यों अहम है योजना?
निर्यातकों के लिए उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत के अलावा विभिन्न स्तरों पर लगने वाले अप्रत्यक्ष कर भी महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे शुल्कों की वापसी से निर्यात उत्पादों की कुल लागत पर असर पड़ सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय का मानना है कि RoDTEP जैसी व्यवस्था की निरंतरता से निर्यातकों को नीति संबंधी स्थिरता मिल सकती है। हालांकि, योजना को पांच साल बढ़ाने पर अंतिम फैसला सरकार के स्तर पर होना बाकी है।
अधिकारी ने कहा कि सरकार पिछले साल के खर्च को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि योजना में विश्वसनीयता बनी रहे।
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