जयशंकर की भूटान यात्रा: ऊर्जा, विकास और गेलेफू परियोजना पर भारत-भूटान ने बढ़ाया सहयोग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 16 से 18 सितंबर तक भूटान यात्रा के दौरान भारत और भूटान ने ऊर्जा, विकास सहयोग, सीमा संपर्क और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 16 से 18 सितंबर तक चली भूटान यात्रा के दौरान भारत और भूटान ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने विकास सहयोग, ऊर्जा, सीमा संपर्क और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी समेत कई क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की।
भूटान के विदेश एवं विदेश व्यापार मंत्री डी. एन. धुंग्येल के निमंत्रण पर हुई इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और भूटान के बीच विशेष एवं बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति का स्वागत किया।
विकास सहयोग को लेकर जताया संतोष
भारत ने भूटान की विकास प्राथमिकताओं और लक्ष्यों को लेकर अपने समर्थन को दोहराया। वहीं, भूटान ने अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों में भारत के सहयोग की सराहना की।
दोनों देशों ने विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए जारी प्रयासों पर संतोष जताया। भारत-भूटान संबंधों में विकास साझेदारी लंबे समय से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रही है।
जलविद्युत सहयोग में आगे बढ़े भारत-भूटान
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मार्च 2024 में तय ऊर्जा साझेदारी के संयुक्त दृष्टिकोण को लागू करने में हुई प्रगति की समीक्षा की।
दोनों देशों ने 1,020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना से जुड़ी प्रगति का स्वागत किया। परियोजना को भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। अप्रैल 2026 में दोनों देशों ने इसके टैरिफ प्रोटोकॉल और रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए थे।
इसके अलावा 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I परियोजना के मुख्य बांध के निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने पर यह दोनों सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की जाने वाली सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक होगी।
भूटान को ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा
भारत और भूटान ने ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट से जुड़े समझौते का भी स्वागत किया। इसके साथ ही भूटान की जलविद्युत परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को भी दोनों पक्षों ने सकारात्मक रूप से लिया।
ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का प्रमुख आधार है। दोनों पक्ष बिजली उत्पादन के साथ-साथ सीमा पार बिजली व्यापार और संबंधित बुनियादी ढांचे में सहयोग को भी आगे बढ़ा रहे हैं।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी पर सहयोग जारी रखने पर सहमति
जयशंकर ने भूटान के राजा की महत्वाकांक्षी Gelephu Mindfulness City (GMC) परियोजना के लिए भारत सरकार का समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने इस परियोजना को लेकर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से हुई बातचीत की समीक्षा की और संबंधित विषयों पर आगे भी सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।
भारत ने असम के हातिसार में आव्रजन जांच चौकी स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इसका उद्देश्य गेलेफू जाने वाले निवेशकों और पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाना है। इस व्यवस्था की घोषणा नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा के दौरान की गई थी।
सीमा संपर्क और लोगों की आवाजाही पर जोर
भारत और भूटान के बीच सीमा संपर्क को मजबूत करना भी सहयोग का अहम हिस्सा है। दोनों देशों ने पहले ही सीमा पार रेल संपर्क से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ना शुरू किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार Gelephu-Kokrajhar और Samtse-Banarhat रेल लिंक से जुड़े समझौते सितंबर 2025 में हुए थे।
हातिसार में आव्रजन सुविधा का विस्तार भी इसी व्यापक सीमा संपर्क व्यवस्था का हिस्सा है, जिससे गेलेफू आने वाले लोगों के लिए आवागमन आसान बनाने का लक्ष्य है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भूटान के विदेश मंत्री डी. एन. धुंग्येल ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत-भूटान के करीबी संबंधों के महत्व को रेखांकित किया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता की अपनी उम्मीदवारी के समर्थन के लिए भूटान का आभार जताया। भारत ने इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) से जुड़े समझौते की भूटान द्वारा पुष्टि किए जाने का भी स्वागत किया।
विश्वास और आपसी समझ पर आधारित हैं संबंध
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने भारत-भूटान संबंधों को विश्वास, सद्भावना और आपसी समझ पर आधारित बताया। दोनों देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर नियमित संपर्क के साथ लोगों के बीच भी मजबूत संबंध हैं।
जयशंकर की यह यात्रा विकास सहयोग, ऊर्जा, सीमा संपर्क और क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच जारी संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में रही। जलविद्युत परियोजनाओं, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और सीमा संपर्क जैसे विषय भारत-भूटान साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों में बने हुए हैं।
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