मां चंद्रबदनी मंदिर: टिहरी की पहाड़ियों में बसा अनोखा शक्तिधाम, जहां श्री यंत्र की होती है पूजा

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में स्थित मां चंद्रबदनी मंदिर अपनी अनोखी पूजा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी की मूर्ति के बजाय श्री यंत्र की पूजा की जाती है। जानिए मंदिर का धार्मिक महत्व, पौराणिक मान्यता, ऊंचाई और यहां पहुंचने का रास्ता।

Sep 18, 2026 - 12:32
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मां चंद्रबदनी मंदिर: टिहरी की पहाड़ियों में बसा अनोखा शक्तिधाम, जहां श्री यंत्र की होती है पूजा

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां पर्वतों के बीच अनेक ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनकी अपनी अलग मान्यताएं और परंपराएं हैं। टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित मां चंद्रबदनी मंदिर भी ऐसा ही एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस मंदिर में देवी की पारंपरिक प्रतिमा के बजाय श्री यंत्र की पूजा की जाती है, जो इसे अन्य देवी मंदिरों से अलग पहचान देता है।

समुद्र तल से करीब 2,277 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंद्रबदनी मंदिर आस्था के साथ-साथ हिमालयी प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। उत्तराखंड पर्यटन से जुड़े दस्तावेजों में भी चंद्रबदनी मंदिर को पर्यटन सुविधाओं के विकास वाले स्थलों में शामिल किया गया है।

शक्ति पूजा का प्रमुख केंद्र है मां चंद्रबदनी मंदिर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मां चंद्रबदनी मंदिर को शक्ति पूजा का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए यहां की धार्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मंदिर का वीडियो साझा करते हुए श्रद्धालुओं से टिहरी गढ़वाल आने पर मंदिर के दर्शन करने की अपील की।

मंदिर के आसपास से हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं और घने जंगलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ प्रकृति और पहाड़ों को पसंद करने वाले यात्रियों के लिए भी यह स्थान आकर्षण का केंद्र है।

मूर्ति की जगह श्री यंत्र की होती है पूजा

चंद्रबदनी मंदिर की सबसे खास परंपराओं में से एक यहां गर्भगृह में देवी की प्रतिमा के स्थान पर श्री यंत्र की स्थापना और पूजा है। श्रद्धालु और मंदिर के पुजारी इसी श्री यंत्र को देवी का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना करते हैं।

मंदिर परिसर में श्री यंत्र के अलावा अन्य देवी-देवताओं से संबंधित प्रतिमाएं और बड़ी संख्या में त्रिशूल भी दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के कारण इनका मंदिर परिसर में विशेष महत्व माना जाता है।

टिहरी के प्रमुख शक्तिधामों में शामिल

स्थानीय धार्मिक परंपराओं में चंद्रबदनी मंदिर को टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के प्रमुख शक्तिधामों में गिना जाता है। इसे कुंजापुरी और सुरकंडा देवी मंदिर के साथ क्षेत्र के महत्वपूर्ण शक्ति उपासना स्थलों में बताया जाता है।

मंदिर की ऊंचाई के कारण यहां से आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है। साफ मौसम में दूर स्थित बर्फ से ढकी पर्वत चोटियां भी नजर आती हैं।

पौराणिक मान्यता से जुड़ा है मंदिर

चंद्रबदनी मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता देवी सती और भगवान शिव की कथा से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में देवी सती ने अपने प्राण त्याग दिए, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे। इस दौरान देवी सती के शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे और उन स्थानों को शक्तिपीठों से जोड़ा गया।

चंद्रबदनी को लेकर प्रचलित मान्यता के अनुसार, यहां देवी सती का धड़ गिरा था। इसी धार्मिक विश्वास के कारण यह स्थान देवी उपासना के प्रमुख केंद्र के रूप में श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।

मंदिर परिसर में मौजूद त्रिशूलों और धार्मिक प्रतिमाओं को भी इसी पौराणिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपरा और स्थानीय आस्था है।

अप्रैल में लगता है मेला

चंद्रबदनी मंदिर में हर साल अप्रैल के दौरान धार्मिक मेले का आयोजन होने की परंपरा बताई जाती है। इस दौरान आसपास के क्षेत्रों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

मेले के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों के लिए भी खास जगह

चंद्रबदनी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराने वाला स्थान भी है। पहाड़ों, जंगलों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर टिहरी गढ़वाल की आध्यात्मिक और प्राकृतिक पहचान को सामने लाता है।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग राज्य को धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति, ट्रेकिंग और आध्यात्मिक अनुभवों के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में बढ़ावा देता है।

जामनीखाल क्षेत्र में स्थित चंद्रबदनी मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम हिस्से में पैदल रास्ते से भी जाना पड़ता है। यही यात्रा श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुभव के साथ पहाड़ी वातावरण को करीब से महसूस करने का अवसर देती है।

हिमालयी वातावरण, श्री यंत्र की अनोखी पूजा परंपरा और देवी सती से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं मां चंद्रबदनी मंदिर को उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देती हैं।

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