NITI Aayog Report: खनिज खोज को तेज करने के लिए नीति आयोग का बड़ा सुझाव, निजी निवेश बढ़ाने पर जोर

नीति आयोग की Trade Watch Quarterly रिपोर्ट में खनिज खोज को तेज करने, निजी निवेश बढ़ाने और भू-वैज्ञानिक आंकड़ों तक आसान पहुंच की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में भारत के metals और ores सेक्टर की वैश्विक स्थिति का भी विश्लेषण किया गया है।

Sep 17, 2026 - 10:40
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NITI Aayog Report: खनिज खोज को तेज करने के लिए नीति आयोग का बड़ा सुझाव, निजी निवेश बढ़ाने पर जोर

नीति आयोग ने भारत के खनिज और धातु क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए खनिज संसाधनों की खोज को तेज करने तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई है। आयोग की ताजा Trade Watch Quarterly रिपोर्ट में भू-वैज्ञानिक आंकड़ों तक आसान पहुंच, खोज से जुड़ी छोटी कंपनियों के लिए जोखिम पूंजी और वित्तीय सहायता तथा निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत के व्यापार और धातु-अयस्क क्षेत्र का विश्लेषण करती है।

मंजूरी और अनुपालन की प्रक्रिया आसान करने की सिफारिश

नीति आयोग ने परियोजनाओं में होने वाली देरी कम करने के लिए अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट की वैधता अवधि बढ़ाने और बार-बार होने वाली मंजूरी प्रक्रियाओं को कम करने की बात कही गई है।

वन भूमि से जुड़े नियमों के तहत दूसरी जगह वन विकसित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पहले से मौजूद परियोजनाओं के विस्तार के लिए स्पष्ट नियम तैयार करने का सुझाव भी दिया गया है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में विस्तार करने वाली परियोजनाओं के लिए स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था से निवेश और परियोजना क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स पर भी फोकस

रिपोर्ट में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ओपन-एक्सेस नियमों में एकरूपता लाने की जरूरत बताई गई है। इसके साथ औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बैंकिंग सीमा बढ़ाने और बिजली पारेषण शुल्क को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया गया है।

खनिज स्लरी के परिवहन के लिए पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने तथा परियोजना स्थल से बाहर की लॉजिस्टिक्स सुविधाओं पर GST से जुड़े मुद्दों को हल करने की सिफारिश भी की गई है।

विमानन उद्योग के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर

नीति आयोग ने विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली उच्च गुणवत्ता वाली धातुओं और मिश्र धातुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत बताई है। इनमें उच्च गुणवत्ता वाला मिश्र धातु इस्पात, विशेष मिश्र धातु, एल्युमीनियम और टाइटेनियम मिश्र धातु शामिल हैं।

रिपोर्ट में चरणबद्ध तरीके से घरेलू सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा विमानन उद्योग की सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के उपाय सुझाए गए हैं।

EU के कार्बन नियमों के लिए निर्यातकों को मदद

नीति आयोग ने यूरोपीय संघ की Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया है। रिपोर्ट में सत्यापन की क्षमता बढ़ाने और भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय संघ की कार्बन रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता देने की जरूरत बताई गई है।

यह कदम उन भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो धातु और अन्य कार्बन-गहन उत्पादों का यूरोपीय बाजार में निर्यात करती हैं।

वैश्विक धातु-अयस्क बाजार में भारत की स्थिति

NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर धातु और अयस्क बाजार का आकार करीब 2 ट्रिलियन डॉलर था। इसमें केवल metals और उनसे जुड़े articles की वैश्विक मांग करीब 1.625 ट्रिलियन डॉलर रही, जबकि ores की मांग करीब 371.5 अरब डॉलर थी।

2025 में भारत का metals और ores से जुड़ा कुल निर्यात करीब 36.8 अरब डॉलर रहा। इसमें metals और उनके articles का निर्यात 34.8 अरब डॉलर और ores का निर्यात करीब 2 अरब डॉलर था। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल metals और ores निर्यात में हिस्सेदारी वैश्विक आयात मांग की करीब 1.8 प्रतिशत रही।

लौह और इस्पात की वैश्विक मांग सबसे बड़ी

वैश्विक metals और ores बाजार में लौह एवं इस्पात की महत्वपूर्ण भूमिका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि iron and steel तथा उनसे बने उत्पाद वैश्विक धातु मांग के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत का निर्यात भी मुख्य रूप से लौह, इस्पात और एल्युमीनियम जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है। इससे संकेत मिलता है कि भारत के लिए केवल कच्चे खनिजों के उत्पादन के बजाय ज्यादा मूल्यवर्धित धातु उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण हो सकता है।

खनिज उत्पादन में भारत की मजबूत स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार भारत प्राथमिक एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादन में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। लौह अयस्क, क्रोमाइट और जस्ता उत्पादन में भारत तीसरे स्थान पर है, जबकि मैंगनीज अयस्क के उत्पादन में पांचवें स्थान पर है।

देश कई प्रमुख थोक खनिजों में काफी हद तक आत्मनिर्भर भी है। रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार लौह अयस्क में आत्मनिर्भरता करीब 100 प्रतिशत, जस्ता में 94 प्रतिशत, क्रोमाइट में 92 प्रतिशत और बॉक्साइट में 90 प्रतिशत है।

वहीं मैंगनीज अयस्क में आत्मनिर्भरता करीब 37 प्रतिशत, तांबे में 35 प्रतिशत और मैग्नेसाइट में 17 प्रतिशत बताई गई है।

निजी निवेश और खोज गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर

नीति आयोग ने इस क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की भू-वैज्ञानिक क्षमता को अभी तक पर्याप्त मात्रा में निरंतर निवेश में परिवर्तित नहीं किया जा सका है।

आयोग के अनुसार, 2000 से 2025 के बीच भारत के खनन क्षेत्र में संचयी FDI इक्विटी निवेश करीब 3.5 अरब डॉलर रहा। यह कुल दीर्घकालिक विदेशी इक्विटी निवेश का 0.5 प्रतिशत से भी कम है। इसलिए भू-वैज्ञानिक जानकारी की उपलब्धता, नियामकीय व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना निवेश आकर्षित करने में मददगार हो सकता है।

आगे की चुनौती: कच्चे संसाधनों से मूल्यवर्धित उत्पादन तक

भारत के पास कई महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन में मजबूत आधार है, लेकिन वैश्विक मूल्य श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए खोज, प्रसंस्करण, तकनीक और मूल्यवर्धित उत्पादन को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।

नीति आयोग की रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों का व्यापक उद्देश्य खनिज संसाधनों की खोज को तेज करना, निवेश और निजी भागीदारी बढ़ाना, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और भारतीय धातु उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ना है।

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