ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, रूसी तेल-गैस खरीदारों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। कानून में रूस के बड़े तेल-गैस खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ और ईरान प्रतिबंधों को पांच साल बढ़ाने का प्रावधान है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस कानून में रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले बड़े आयातकों और रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदमों का प्रावधान है।
कानून राष्ट्रपति को ऐसे देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था देता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित देशों पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। कानून में इसके लिए विशेष परिस्थितियां और दायरा निर्धारित किया गया है।
पांच बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार निशाने पर
अमेरिकी सीनेटर कैटी ब्रिट के कार्यालय के अनुसार, कानून राष्ट्रपति को रूस के कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों पर या रूसी तेल से जुड़े प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का निर्देश देता है।
अभी तक अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन देशों पर वास्तविक तौर पर टैरिफ लगाया जाएगा और किसी देश के लिए दर कितनी होगी। इसलिए फिलहाल किसी खास देश पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता।
कुछ देशों को मिल सकती है छूट
कानून में कुछ परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है। ऐसे देश जिनके रूस से प्राकृतिक गैस आयात का हिस्सा रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम है और जो रूसी गैस पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं, उन्हें इस प्रावधान के तहत राहत मिल सकती है।
रूसी अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर भी कार्रवाई
नया कानून सिर्फ ऊर्जा खरीद को ही निशाना नहीं बनाता। इसके तहत रूस के अधिकारियों, बड़े कारोबारियों और उनके परिवार के सदस्यों, कुछ विदेशी व्यक्तियों, रूसी बैंकों और वित्तीय संस्थानों तथा रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ पर प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
अमेरिकी सांसदों के अनुसार, इन प्रावधानों का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और उसके ऊर्जा निर्यात से जुड़े उन नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है, जिन्हें मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने से जोड़ा जाता है।
ईरान पर प्रतिबंधों की अवधि भी बढ़ी
कानून में ईरान से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। इसके तहत Iran Sanctions Act के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लगाने का अधिकार पांच साल के लिए बढ़ाया गया है। सीनेटर ब्रिट के कार्यालय के मुताबिक, यह व्यवस्था ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता पर प्रतिबंधों को जारी रखने से संबंधित है।
कांग्रेस से मजबूत समर्थन के बाद ट्रंप ने किया हस्ताक्षर
कानून को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को इसे 86-11 के मत से पारित किया था, जबकि प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को 262-159 के मत से मंजूरी दी। इसके बाद 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया।
हस्ताक्षर के समय सीनेटर कैटी ब्रिट और प्रतिनिधि माइकल मैककॉल समेत अन्य सांसद ओवल ऑफिस में मौजूद थे। ब्रिट ने कहा कि इस कानून के जरिए रूस और रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने का संदेश दिया गया है। यह उनका राजनीतिक आकलन है; कानून के वास्तविक प्रभाव उसके क्रियान्वयन और आगे जारी होने वाले प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेंगे।
भारत समेत बड़े खरीदारों पर नजर
नए कानून के बाद उन देशों पर भी ध्यान गया है जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को संभावित रूप से प्रभावित होने वाले देशों में गिना है। हालांकि, कानून पर हस्ताक्षर के समय अमेरिकी प्रशासन ने किसी विशेष देश पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं की थी।
इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी राष्ट्रपति कानून में दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करते हैं और किन देशों के खिलाफ वास्तविक टैरिफ या अन्य प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाते हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)