Rabi MSP 2027-28: छह रबी फसलों की MSP बढ़ी, कुसुम-सोयाबीन नहीं बल्कि सरसों पर भी बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं, चना, मसूर, जौ, रेपसीड-सरसों और कुसुम की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कुसुम में ₹675 और सरसों में ₹413 प्रति क्विंटल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई।

Sep 30, 2026 - 19:52
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Rabi MSP 2027-28: छह रबी फसलों की MSP बढ़ी, कुसुम-सोयाबीन नहीं बल्कि सरसों पर भी बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और कृषि आय को मजबूत करना है। छह फसलों के लिए MSP में कुल अनुमानित अतिरिक्त भुगतान करीब 90,962 करोड़ रुपये रहने की बात सामने आई है।

कुसुम की MSP में सबसे बड़ी बढ़ोतरी

नई MSP व्यवस्था में कुसुम के समर्थन मूल्य में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके बाद कुसुम की MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।

रेपसीड और सरसों की MSP में 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसकी नई MSP 6,613 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।

मसूर, जौ और चने की नई MSP

मसूर की MSP में 390 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसकी नई MSP 7,390 रुपये प्रति क्विंटल होगी।

वहीं जौ की MSP में 136 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नया समर्थन मूल्य 2,286 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। चने की MSP में 83 रुपये की वृद्धि की गई है और इसकी नई MSP 5,958 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है।

गेहूं की MSP में 25 रुपये की वृद्धि

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद 2027-28 सीजन के लिए गेहूं की नई MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल होगी।

सरकार का कहना है कि MSP नीति के तहत उत्पादन लागत के ऊपर किसानों को निर्धारित मार्जिन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

सभी छह फसलों की नई MSP

रबी फसल| MSP में बढ़ोतरी| नई MSP

कुसुम| ₹675| ₹7,215/क्विंटल

रेपसीड एवं सरसों| ₹413| ₹6,613/क्विंटल

मसूर| ₹390| ₹7,390/क्विंटल

जौ| ₹136| ₹2,286/क्विंटल

चना| ₹83| ₹5,958/क्विंटल

गेहूं| ₹25| ₹2,610/क्विंटल

दलहन और तिलहन उत्पादन पर जोर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, सरकार का जोर देश में दलहन और तिलहन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है। मसूर और चने की MSP में बढ़ोतरी को इसी रणनीति से जोड़ा गया है।

धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

रेपसीड और सरसों की MSP में 413 रुपये की वृद्धि को खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश से जोड़ा गया है। वहीं कुसुम की MSP में सबसे अधिक वृद्धि का उद्देश्य कम उपजाऊ और असिंचित क्षेत्रों में इसकी खेती को प्रोत्साहित करना बताया गया है।

जौ की खेती को बढ़ावा

सरकार ने जौ की खेती को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। कृषि मंत्री के अनुसार, जौ अपेक्षाकृत कम पानी में उगाई जाने वाली फसल है। MSP में बढ़ोतरी के जरिए इसके उत्पादन को बढ़ाने और आयात की जरूरत कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्यों के हिसाब से रबी रणनीति

कृषि मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों की जलवायु, पानी की उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य-विशिष्ट रबी योजनाओं पर भी काम किया है।

कम पानी वाले क्षेत्रों में सूखा-सहिष्णु फसलों को बढ़ावा देने, जबकि पर्याप्त जल उपलब्धता वाले राज्यों में उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह रणनीति रबी सीजन में फसल विविधीकरण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जुड़ी है।

किसानों की आय और कृषि आत्मनिर्भरता पर फोकस

सरकार के मुताबिक, MSP में बढ़ोतरी, दलहन-तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन और राज्य-विशिष्ट कृषि योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय तथा कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

रबी सीजन 2027-28 के लिए MSP में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब सरकार उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पर भी जोर दे रही है।

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