Seva First Innovation Challenge 2026: प्रल्हाद जोशी ने युवाओं से सेवा को नवाचार से जोड़ने की अपील
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने IISc बेंगलुरु में Seva First Innovation Challenge का उद्घाटन किया। SFIC के जरिए युवाओं को वास्तविक समस्याओं की पहचान कर व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू होने वाले समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।
बेंगलुरु: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने युवाओं से समाज की वास्तविक समस्याओं को पहचानकर उनके व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा की भावना को नवाचार से जोड़कर युवा विकसित भारत@2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
जोशी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र के लिए ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ (SFIC) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने पहल की वेबसाइट और पंजीकरण पोर्टल भी लॉन्च किया।
वास्तविक समस्याओं के समाधान पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेवा केवल भावना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे काम के रूप में भी सामने आना चाहिए। किसी वास्तविक समस्या को समझना और उसके लिए ऐसा नवाचार तैयार करना जिसे बड़े स्तर पर अपनाया जा सके, सेवा की प्रभावी अभिव्यक्ति हो सकती है।
उन्होंने युवाओं की बड़ी आबादी को भारत की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी तकनीक के इस्तेमाल में सहज होने के साथ-साथ नए विचारों और प्रयोगों के लिए तैयार है। ऐसे युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना जरूरी है।
NEP 2020 और नवाचार पर जोर
प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, अनुभव आधारित शिक्षा और समस्या समाधान को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसी दृष्टिकोण के तहत विद्यार्थियों को कम उम्र से ही प्रयोग करने, चीजें बनाने और नए समाधान विकसित करने के अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने देश में नवाचार के लिए अटल टिंकरिंग लैब, इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।
पांच राष्ट्रीय विषयों पर तैयार होंगे समाधान
SFIC के तहत विद्यार्थियों और युवा नवाचारकर्ताओं को पांच प्रमुख राष्ट्रीय विषयों पर समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। इनमें स्वच्छ और टिकाऊ भारत, समृद्ध किसान-समृद्ध भारत, स्वस्थ और समावेशी भारत, शिक्षित और कुशल भारत तथा सुरक्षित भारत शामिल हैं।
चैलेंज में स्कूलों, ITI, पॉलिटेक्निक, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। पहल में समस्या की पहचान से लेकर समाधान के विकास और उसे वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने तक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था रखी गई है।
दक्षिण भारत के लिए IISc बना नोडल संस्थान
IISc बेंगलुरु को दक्षिण क्षेत्र का नोडल संस्थान बनाया गया है। यह कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप के प्रतिभागियों को तकनीकी मूल्यांकन और मार्गदर्शन में सहयोग करेगा।
चुनौती के तहत प्रतिभागियों को अकादमिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से मेंटरशिप, प्रयोगशाला और परीक्षण सुविधाएं, इनक्यूबेशन तथा प्रोटोटाइप और पायलट स्तर पर समाधान विकसित करने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अच्छे समाधानों को संबंधित सरकारी संस्थानों, स्थानीय निकायों और उद्योगों तक पहुंचाने का भी प्रावधान है।
25 सितंबर से शुरू होगा पंजीकरण
SFIC के लिए पंजीकरण 25 सितंबर से 24 अक्टूबर 2026 तक खुले रहेंगे। कार्यक्रम का समापन दिसंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय फिनाले के साथ होगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्टार्टअप और उद्योग जगत से भी युवा नवाचारकर्ताओं के साथ जुड़ने और उपयोगी समाधानों को आगे बढ़ाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अच्छे विचारों को प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन में लागू करने के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
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