T-72 और T-90 टैंकों के लिए ₹586 करोड़ का स्वदेशी APU कॉन्ट्रेक्ट, रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों के लिए स्वदेशी Auxiliary Power Units की खरीद हेतु ₹586 करोड़ का अनुबंध किया है। यह कदम बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण और Make-II के तहत रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने से जुड़ा है।

Sep 22, 2026 - 11:35
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T-72 और T-90 टैंकों के लिए ₹586 करोड़ का स्वदेशी APU कॉन्ट्रेक्ट, रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम

नई दिल्ली: भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों की संचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने इन टैंकों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित Auxiliary Power Units (APUs) की खरीद के लिए ₹586 करोड़ का अनुबंध किया है। यह कॉन्ट्रेक्ट Accurate Industrial Controls Private Limited के साथ किया गया है। अनुबंध पर 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए।

क्या है APU और टैंक में इसका काम?

Auxiliary Power Unit यानी APU टैंक के लिए विद्युत शक्ति उपलब्ध कराने वाला एक वैकल्पिक स्रोत है। इसका इस्तेमाल टैंक के फायर कंट्रोल सिस्टम, फायरिंग सर्किट, गन स्टेबिलाइजेशन सिस्टम और अन्य सहायक उपकरणों को बिजली उपलब्ध कराने में किया जाता है।

स्वदेशी APU को T-72 और T-90 टैंकों में शामिल किए जाने से भारतीय सेना की मशीनीकृत इकाइयों की संचालन तत्परता, विश्वसनीयता और टिकाऊपन को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

₹586 करोड़ का हुआ अनुबंध

रक्षा मंत्रालय ने APU की खरीद के लिए Accurate Industrial Controls Private Limited के साथ ₹586 करोड़ का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम भारतीय सेना के बख्तरबंद प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों के स्वदेशीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है।

यह अनुबंध ऐसे समय में हुआ है जब रक्षा क्षेत्र में घरेलू डिजाइन, विकास और उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

Make-II के तहत उद्योग की भूमिका

मंत्रालय ने इस परियोजना को Make-II के तहत उद्योग के नेतृत्व में किए गए रिसर्च और डेवलपमेंट का उदाहरण बताया है। Make-II व्यवस्था के तहत उद्योग द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए रक्षा उपकरणों एवं प्रणालियों को उत्पादन के लिए आगे बढ़ाया जाता है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, APU की खरीद यह भी दिखाती है कि स्वदेशी तकनीक को विकसित करने के बाद उसे उत्पादन और सैन्य उपयोग में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में कदम

T-72 और T-90 जैसे बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों का स्वदेशीकरण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। मंत्रालय ने इस अनुबंध को ‘विकसित भारत @2047’ के विजन से भी जोड़ा है।

सरकार के अनुसार, ऐसे स्वदेशी रक्षा समाधानों से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के साथ एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा विनिर्माण आधार तैयार करने में मदद मिलेगी।

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